जीवन के सभी संकटों को दूर करेगी ज्येष्ठ संकष्टी चतुर्थी, जानें इसका महत्व
19 मई दिन गुरुवार को ज्येष्ठ संकष्टी चतुर्थी का पर्व है और इस दिन आपके जीवन से सभी संकट हमेशा के लिए दूर हो सकते हैं। एकदंत संकष्टी चतुर्थी को व्रत रखने के साथ सही मुहूर्त में पूजा की जाती है। इस दिन का विषेश महत्व इसलिए है कि क्योंकि इसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
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बताया जाता है कि एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पर्वत गए तो गणेश जी उनको अंदर जाने से रोक दिया। परशुराम ने उनको कई बार निवेदन किया लेकिन गणेश नहीं माने तो परशुराम जी अत्यंत क्रोधित हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने फरसे से प्रहार कर गणेश जी का एक दांत टूट गया, तब से गणेश जी को एकदंत कहते हैं।
ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि : 19 मई, दिन: गुरुवार,
अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक
चंद्रोदय समय: रात 10 बजकर 54 मिनट पर

संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त
एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत में पूजा पाठ और मांगलिक कार्य करना शुभ होता है।
पूजा विधि:
संकष्टी चतुर्थी की पूजा 19 मई को सुबह करें और उस समय गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना करना नहीं भूले। इस दिन पूजा में लाल फूल, पान, सुपारी, धूप, दीप, गंध, आदि का इस्तेमाल जरूर करें। इस दिन गणेश मंत्रों का जाप करने से जीवन से सभी संकटों का नाश हो जाएगा।





