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होलाष्टक 2022: 8 दिन तक भूलकर भी न करें ये काम, हो जाएंगे बर्बाद

प्रकाशित: Mar 09, 2022 19:26रिपोर्ट: Navtej TV

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन चैत्र माह की प्रतिपदा के दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है। होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाते है जिसमें किसी प्रकार के शुभ कार्य करने बंद कर दिए जाते हैं। हर बार की तरह इस बार भी होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होगा जो होलिका दहन तक चलता है।

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इस बार होलाष्टक 10 मार्च से 17 मार्च तक रहेगा जो होलिका दहन के दिन यानी 17 मार्च को खत्म होगा। होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य करना शुभ नहीं मान जाता है और अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जिंदगी में कई प्रकार की परेशान होनी शुरू हो जाती है।

होलाष्टक के समय केवल भगवान की भक्ति करना ही शुभ होता है क्योंकि विष्णु भक्त प्रहलाद ने भी 8 दिनों तक कई प्रकार पीड़ा सहने के बाद भी भगवान का नाम जपना बंद नहीं किया था। इसी वजह से भगवान ने उसकी रक्षा करने के लिए धरती पर अवतार लिया था। बताया जाता है कि होली के 8 दिन पहले यानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि से हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को यातनाएं देना शुरू कर दिया था।


लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ और 8 दिन बाद फाल्गुन पूर्णिमा को हिरण्यकश्यप की बहन होलिका स्वयं प्रहलाद को गोद में लेकर उसे मारने के लिए जलती अग्नी में बैठ गयी लेकिन वह जलकर मर गई, लेकिन प्रह्लाद बच गए। इन 8 दिनों में प्रहलाद पर जो अत्याचार हुए इसी वजह से 8 दिन तक कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

होलाष्टक के 8 दिन तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है और शास्त्रों के अनुसार 16 संस्कार जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह जैसे संस्कार वाले शुभ कामों पर पांबदी लग जाती है।