मातृत्व स्वास्थ्य में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले लोगों का किया सम्मान
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रदेश में मातृत्व स्वास्थ्य में उत्कृष्ठ कार्य करने पर मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार समारोह के दौरान चिकित्सा सचिव श्री आशुतोष पेडणेकर द्वारा सर्वोत्तम सेवा प्रदाताओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया है।
टीम अवार्ड श्रेणी में बांसवाडा जिले की सीएचसी तलवाड़ा को प्रथम, उदयपुर जिले की पीएचसी भाबराना को द्वितीय एवं पाली जिले की सीएचसी बेरा को तृतीय स्थान प्राप्त करने पर, व्यक्ति अवार्ड श्रेणी में कोटा जिले के निजी चिकित्सक डॉ. प्रियंका माहेश्वरी को प्रथम एवं बांरा जिले के डॉ. सत्यप्रकाश गुप्ता को द्वितीय अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार विशिष्ट अवार्ड श्रेणी में पाली जिले को प्रथम, उदयपुर जिले को द्वितीय एवं भीलवाड़ा जिले को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही निजी सहयोगी संस्था फॉगसी एवं आईएमए को सम्मानित किया।
राज्य में पीएमएसएमए के दौरान गर्भवती महिलाओ के एएनसी जॅाच के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला (एचआरपी) के रूप में चिन्हित होने पर, उच्च जोखिम वाली महिलाओं का गर्भकाल, प्रसव के दौरान, प्रसव के बाद 45 दिनो तक ट्रेकिंग करते हुये स्वस्थ जच्चा-बच्चा सुनिश्चित किये जाने पर संबंधित आशा को प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला के 3 अतिरिक्त एएनसी जांच चिकित्सक के माध्यम से कराने पर आशा को राशि रुपये 300 प्रति एचआरपी तथा प्रसव के बाद 45 दिनो के उपरांत स्वस्थ जच्चा-बच्चा होने पर राशि रुपये 500 प्रति एचआरपी प्रोत्साहन राशि के रूप में आगामी वित्तीय वर्ष से दी जायेगी।
चिकित्सा सचिव श्री आशुतोष पेडणेकर ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में लगातार गिरावट आना और लगभग 95 फीसद संस्थागत प्रसव होना महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने कहा कि प्रयास किए जाएं कि राज्य के ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा संस्थान लक्ष्य से प्रमाणित हों।
चिकित्सा सचिव ने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे में तेजी से सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 360 चिकित्सा संस्थान लक्ष्य कार्यक्रम से प्रमाणित हैं। सभी चिकित्सा संस्थानों पर डिलीवरी सिस्टम में सुधार के प्रयास किए जाएं, रैंकिंग इंडिकेटर्स पर काम किया जाए, साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा संस्थान लक्ष्य के दायरे में आ सकें।
श्री पेडणेकर ने कहा कि राज्य सरकार के सराहनीय प्रयासों से गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव संबंधी सेवाएं प्रदान की जा रही है। वर्तमान में राज्य की मातृ मृत्यु दर 23 दशमलव घटकर 141 प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर आ गई है जो कि 1999-2001 में 501 थी। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव की संख्या में भी उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने इस आंकड़े को 95 फीसद से शत-प्रतिशत तक ले जाने पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ जितेंद्र कुमार सोनी ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हो रही है। कर्नाटक के बाद राजस्थान में 95 फीसद प्रसव चिकित्सा संस्थानों में हो रहे हैं। उन्होंने पीएमएसएमए, सुमन, प्रसव वॉच, दक्षता जैसे कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन के भी निर्देश दिए।
श्री सोनी ने बताया कि राज्य में लक्ष्य कार्यक्रम में प्रदेश के 30 लेबर रूम तथा 18 मैटरनल ओटी में गुणवत्ता परक कार्य तथा उत्कर्ष सेवाएं प्रदान करने पर लक्ष्य कार्यक्रम के राष्ट्रीय स्तर से सम्मानित तथा प्रमाणित किया गया। लक्ष्य से प्रमाणित होने वाले मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा संस्थानों को 6 लाख प्रसव कक्ष और 6 लाख मेटरनिटी ओटी, जिला अस्पताल को 3 लाख प्रसव कक्ष और 3 लाख मेटरनिटी ओटी और उप जिला व सेटेलाइट एवं सीएससी संस्थानों को 2-2 लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया गया।
आरसीएच निदेशक श्री केएल मीणा ने वीसी के माध्यम से जुड़े सभी सीएमएचओ व संबंधित अधिकारियों को आईएमआर और एमएमआर को कम करने के प्रयास तथा सभी योजनाओं की मॉनिटरिंग पर भी ज्यादा जोर देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मातृत्व स्वास्थ्य व शिशु स्वास्थ्य की कार्ययोजना बनाकर हम प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं।





