शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति की गरिमा बनाए रखने का दिया संदेश
धार
रिपोर्ट--प्रतीक सिंह राठौर
भोजशाला आंदोलन के बीच मंगलवार सुबह काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज धार पहुंचे। यहां उन्होंने ऐतिहासिक भोजशाला परिसर पहुंचकर मां वाग्देवी की प्रतिमा का विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन किया। शंकराचार्य जी के भोजशाला पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता परिसर में एकत्रित हो गए। पूरे परिसर में जय श्रीराम और मां वाग्देवी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।पूजन के दौरान हिंदू महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ठाकुर सहित कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भोजशाला परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।बताया जा रहा है कि भोजशाला आंदोलन में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने मां वाग्देवी के दर्शन कर देश और समाज में सुख-शांति की कामना की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने का संदेश भी दिया।भोजशाला में पूजा-अर्चना के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की मौजूदगी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि मां वाग्देवी की पूजा से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है।वहीं भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का गर्मजोशी से स्वागत किया। समिति की ओर से पुष्पमाला पहनाकर एवं भगवा दुपट्टा भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान समिति पदाधिकारियों ने भोजशाला आंदोलन और धार्मिक गतिविधियों को लेकर चर्चा भी की। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।




