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इस कारण मुस्लिम समुदाय मनाता है मातम, जानें इसकी पूरी कहानी

प्रकाशित: Aug 09, 2022 18:46रिपोर्ट: Navtej TV

इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम का होता है और इस साल 31 जुलाई 2022 से यह महीना शुरू हो चुका है। मुहर्रम के 10वें दिन रोज ए आशुरा का त्योहार मनाया जाता है और इस दिन ताजिए निकाले जाते हैं।

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इस महीने को शिया मुस्लिम गम के रूप में इसे मनाते हैं और इसकी शुरूआत 1400 साल पहले कर्बला में इंसाफ की जंग से हुई थी। इस जंग में पैगंबर हजरत मोहम्‍मद के नवासे इमाम हुसैन अपने साथियों के साथ शहीद हुए थे।

बताया जाता है कि इन लोगों ने इस्लाम की रक्षा के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। यह घटना मुहर्रम के 10वें दिन यानी रोज.ए.आशुरा के दिन हुई थी और उनकी शहादत को याद करते हुए इस दिन ताजिए निकाले जाते हैं। शिया समुदाय के लोग मातम मनाते हैं और काले रंग के कपड़े पहनकर शोक व्यक्त करते हैं।


लोग भूखे-प्यासे रहकर शोक व्यक्त करते हैं तो सुन्नी समुदाय के लोग रोजा नमाज करके अपना दुख प्रकट करते हैं। शिया मुस्लिम अपने जिस्म का खून बहाते हैं तो वहीं सुन्नी मुस्लिम नमाज पढ़कर अपना दुख प्रकट करते हैं।