निर्जला एकादशी के दिन जरूर करें ये काम, मिलेगी पापों से मुक्ति
एकादशी ये बहुत ही पावन तिथि हैं, सारे वेद और शास्त्र एक ही सुर में कहते हैं..कि भगवत भक्ति में प्रगति करने के लिए..एकादशी व्रत का पालन करना बहुत जरुरी हैं..इतना ही नही बल्कि ये भी कहा जाता हैं कि.. शारीरिक रूप से अन्न का व्रत रखना जरुरी हैं लेकिन इस्सी के साथ ही आत्मा को भी इसकी खुराक मिलनी चाहिये और वोह खुराक हैं हरि नाम और हरि कथा .... इस दिन अपना ज्यादा से ज्यादा समय भगवान के नामों का जप करे और वैष्णव के साथ में भगवान की लीलाओं का श्रवण करने में लगाये...
श्रीमद भगवत गीता में भी इस बात का वर्णन हैं आपको बता दें जिसमे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि..वो भी परमभोगता हैं..इसलिए एकादशी का व्रत किसी भी प्रकार की भौतिक लालसा की इच्छा से नही बल्कि केवल और केवल भगवान की प्रशन्नता के लिए करना चाहिये...और उन्हें ही अर्पित करना चाहिये.. पद्मपुराण के अनुसार निर्जला एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक पर्व है जो हर साल शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भारतीय हिन्दू समुदाय में विशेष रूप से प्रचलित है, लेकिन कुछ अन्य हिन्दू जनजातियों द्वारा भी मनाया जाता है। निर्जला एकादशी को व्रत के रूप में मनाने का मुख्य उद्देश्य अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध बनाने का होता है..
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी के दिन जरूर करें ये काम,चमक जाएगी किस्मत
निर्जला एकादशी के दिन व्रती लोग पूरे दिन निर्जला उपवास (निर्जला अर्थात् 'निर' - बिना और 'जल' - पानी) करते हैं, जिसमें वे निर्जला उपास्य के रूप में पानी नहीं पीते हैं। इस दिन अन्न और पानी के सभी प्रकार का त्याग किया जाता है। यह व्रत बहुत शक्तिशाली माना जाता है और इसे भगवान विष्णु के अराधना के रूप में मनाने से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है माना जाता है..निर्जला एकादशी का व्रत बहुत सख्त होता है और इसे सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही नियमित रूप से मनाया जाता है..इस बार निर्जला एकादशी 30 मई 2023 को दोपहर 1:32 से अगले दिन यानि 31 मई को दोपहर 1:36 पर समाप्त होगी...आप भी रखिये इस निर्जला एकादशी का व्रत और पाये मोक्ष की प्राप्ति




