अपनी ही मां का गला काटकर परशुराम ने पूरा किया था अपने पिता का वचन
आज अक्षय तृतीया यानि आखा तीज है जिसे हिन्दू धर्म में बेहद खास माना गया है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, परशुराम को जहां न्याय का देवता माना जाता है वहीं ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र परशुराम को एक आज्ञाकारी पुत्र भी माना जाता है लेकिन भगवान परशुराम के बारे में कहा जाता है कि उन्होने अपनी मां की गर्दन काटकर धड़ से अलग कर दी थी, तो माता-पिता के आज्ञाकारी पुत्र परशुराम ने ऐसा क्यों किया और गर्दन काटने के बाद क्या हुआ चलिये आपको बताते है।
EID से पहले loudspeaker -झंडे पर विवाद, police ने छोड़े आंसू गैस के गोले
ब्रह्रावैवर्त पुराण के अनुसार, श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार भगवान परशुराम माता रेणुका और ॠषि जमदग्नि की चौथी संतान थे, एकबार ऋषि पत्नी सरोवर में स्नान के लिए गई हुई थी, तभी राजा चित्ररथ नौकाविहार कर रहे थे. राजा को देख ऋषिपत्नी के हृदय में विकार उत्पन्न हुआ और वो उसी मनोदशा में आश्रम में लौट आईं, ऋषि जमदग्नि ने जब पत्नी की यह विकारग्रस्त दशा देखी तो वो क्रोधित हो गए, तभी उन्होंने अपने पुत्रों को माता के वध का आदेश दिया,
लेकिन मां से मोहवश उनके किसी भी पुत्र ने उनकी इस आज्ञा का पालन नहीं किया तो पिता ने मां का वध करने के लिए परशुराम से कहा तो उन्होने तुरंत अपने परशु से मां का सिर धड़ से अलग कर दिया, यह देखकर ऋषि जमदग्नि अपने पुत्र परशुराम से बेहद प्रसन्न हुए और परशुराम के आग्रह करने पर उनकी मां को पुन जीवित कर दिया।

ऋषि जमदग्नि पुत्र से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होने परशुराम को ख्याति अर्जित करने और समस्त शास्त्र और शस्त्र का ज्ञाता होने का आशीर्वाद दिया। वहीं परशुराम को माता की हत्या करने का पाप भी लगा, भगवान शिव की कठोर तपस्या करने के बाद उन्हें इस पाप से मुक्ति मिली, भगवान शिव ने परशुराम को मृत्युलोक के लिए कल्याणार्थ परशु अस्त्र प्रदान किया, इसकी वजह से वो परशुराम कहलाए।





