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पायलट के आगे कांग्रेस आलाकमान भी लाचार, फैसले की अंतिम घड़ी!

प्रकाशित: Apr 11, 2023 12:59रिपोर्ट: Navtej TV

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी कलह फिर खुलकर सामने आ गई है। पायलट ने अब अपनी अंतिम चाल चल दी है क्योंकि वह अब आलाकमान के आश्वासनों से तंग आकर अब खुलकर अपनी बात रख दी है। पायलट जयपुर के शहीद स्मारक पर अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठने का ऐलान कर चुके हैं, जिसके बाद दिल्ली आलाकमान की चिंताए बढ़ी हुई है।

क्योंकि कांग्रेस अब इस धर्म संकट में फंस गई है कि वह पायलट का साथ दे या उनके खिलाफ कार्यवाही करें। क्योंकि ऐसा करने से नुकसान पार्टी को ही उठाना पड़ेगा। पायलट अनशन पर बैठने के बाद से ही उनके खिलाफ एक्शन लेने की बात तो हुई लेकिन ऐसा नहीं होगा।

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट अनशन करते हैं तो यह पार्टी के खिलाफ माना जाएगा। लेकिन पायलट पर एक्शन होगा या नहीं इसका जवाब नहीं दिया क्योंकि पायलट की मांगों पर गहलोत गुट के मंत्री ने समर्थन किया है।

रंधावा ने कहा पायलट को पहले हमसे बात करनी चाहिए थी, इस पर मैं सीएम गहलोत से बात करता और उसके बाद अनशन पर बैठते तो अच्छा रहता। पायलट का यह कदम गहलोत के खिलाफ ही नहीं बल्कि पार्टी के विरोध में भी है।

पायलट ने जब बगावत की तो उस समय पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने गहलोत सरकार को बचाने का काम किया था इसी बात कही जाती है। इसमें कितनी सच्चाई है उसका प्रमाण तो नहीं है लेकिन अब अंतिम साल में राजे के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच का मुद्दा उठाना बहुत कुछ कह रहा है। कांग्रेस के पास बीजेपी सरकार के खिलाफ सबूत थे, लेकिन कार्रवाई नहीं की जो गलत है।

पायलट समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे है कि उनको प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाए। पायलट खेमा चाहता है चुनाव से पहले सीएम उम्मीदवार घोषित हो लेकिन गहलोत ऐसा कभी नहीं होने देंगे। क्योंकि इससे पहले कांग्रेस ने पंजाब की तरह राजस्थान में भी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदला था लेकिन उसका नुकसान उठाना पड़ा था।

वर्तमान की बात करें तो कांग्रेस गहलोत के सहारे राजस्थान में वापसी की उम्मीद लगा रही है और भविष्य में उनको पायलट से बड़ी उम्मीद है। गहलोत ने साफ कर दिया है कि वह पद नहीं छोड़ेंगे और इस बार सत्ता परिवर्तन की परंपरा को तोड़ देंगे। लेकिन अब सचिन पायलट आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं, वह जनता की सहानुभूति के सहारे बड़ा कदम उठाने की सोच रहे हैं।

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सियासी जानकारों का मानना है कि पायलट कांग्रेस हाईकमान के आदेश का इंतजार कर रहे है कि वह उनको या तो फ्री हैंड दे और सीएम चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करे या फिर उनके खिलाफ कोई एक्शन ले ताकि वह अगला कदम उठा सकें।

कांग्रेस प्रभारी रंधावा जयपुर पहुंच गए हैं और पायलट को मनाने की कोशिश कर सकते हैं और चुनावों से पहले आश्वासन देकर इस मामले को शांत करना चाहेंगे। लेकिन पायलट ने बहुत लंबा इंतजार किया है क्योंकि उनको आम आदमी पार्टी के साथ अब हनुमान बेनिवाल की तरफ से बड़ा संदेश मिला है। अगर पायलट कांग्रेस को छोड़कर अपना दल बनाऐंगे और गठबंधन की सरकार बनाकर अपनी ताकत दिखाएंगे।