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धर्म

इस कारण मनाया जाता है श्राद्ध, जानें इसकी रोचक कहानी

प्रकाशित: Sep 13, 2022 20:18रिपोर्ट: Navtej TV

हिंदु धर्म में भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरूआत होती है। पितृ पक्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इन 15 दिनों में सभी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए उनको भोजन अर्पित करते है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि श्राद्ध किस लिए मनाया जाता है अगर आपको इस बात की जानकारी नहीं है तो आपके लिए यह खबर बहुत जरूरी है।

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प्राचीन परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध की शुरुआत महाभारत काल में शुरू हुई तो आज तक चली आ रही है। भीष्म पितामह ने श्राद्ध करने की जानकारी युधिष्ठिर को दी थी और इसका भी एक कारण था।गरुड़ पुराण में बताया गया है कि भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को पितृपक्ष में श्राद्ध और उसके महत्व के बारे में बताया था। अत्रि मुनि ने सबसे पहले श्राद्ध के बारे में महर्षि निमि को ज्ञान दिया क्योंकि उनके पुत्र की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी।

इसके बाद निमि ऋषि ने अपने पूर्वजों का आह्वान किया तो उनके पूर्वज प्रकट हुए और उन्होंने बताया कि उनका पुत्र पहले ही पितृ देवों के बीच स्थान ले चुका है। इसके बाद से श्राद्ध करना शुरू हुआ। युधिष्ठिर ने कौरव और पांडवों की ओर से युद्ध में मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार के बाद उनका श्राद्ध किया था जिसके बाद से यह परंपरा शुरू हुई थी।


दान करने के लिए विख्यात दानवीर कर्ण मरने के बाद जब वह स्वर्ग पहुंचे तो उनको वहां खाने के लिए सोना दान में दिया गया। उन्होंने इंद्र से पूछा कि उन्हें खाने में सोना क्यों दिया जा रहा है इस पर उनको जवाब मिला आपने पूरी उम्र सोना ही दान किया था। आपने अपने पितरों को खाना नहीं खिलाया तो आपको खाना नहीं मिलेगा। इसके बाद उसने अपने पूर्वजों का पिंडदान किया और उनको खाना खिलाया तो श्राद्ध की परंपरा शुरू हो गई।