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सीएम गहलोत के दावों की खुलती पोल, आजादी के बाद से नहीं मिली सड़क और बिजली,वाक गांव की दास्ता

प्रकाशित: May 12, 2023 16:39रिपोर्ट: Navtej TV

बाँसवाड़ा राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले का एक ऐसा गाँव जहा देश आजाद होने के 75साल बीत जाने के बाद भी वांक गांव के 100से ज्यादा घरों के वाशिंदे आज भी अंधेरे में रात गुजार रहे है आजाद भारत के इस गांव के लोग सरकार के विकास की वाट देख रहे है 500की आबादी वाले गांव के लोग आज भी काली रात के घनघोर अंधेरे में रात बिताते हैं जबकी 40 डिग्री टेम्परेजर में दिन बिताते हैं। इस गांव की तस्वीर देख ऐसा लगता है कि शायद इस गांव में किसी सफेद पोश की इंट्री नही हुई लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा है क्युकी आज तक कितनी पार्टी चुनाव जीती कितने नेता विधायक मंत्री बने सब कुछ बदला लेकिन नही बदली तो बस इस गांव की तस्वीर हाल ही में सरकार ने अपने बजट में सरकार ने बाँसवाड़ा जिले को संभाग घोषित कर दिया है इस घोषणा से हर बांसवाड़ा वाशियो के जुबा पर खुशी की राहत नजर आई थी लेकिन विपक्षी दल ने वर्तमान में बनाये नए जिले को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार ने बिना किसी तैयारी के घोषित कर दी।अब तो वाक गाँव के 100 से ज्यादा घरों वाली आबादी के लोग भी सरकार से सवाल कर पूछ रहे है कि हमारा क्या कसूर था जो हमने विकास के नाम पर वोट दिए ताकि गाँव मे मूलभूत समस्या से निजात मिले लेकिन यहाँ तो नेता वोट लेने के बाद मुड़कर मुह तक नही दिखाने आते हैं।ग्रामीण बोले मुख्यमंत्री जी और उनके मंत्री बार बार सभाओं में कह रहे है कि हमारी सरकार ने चुनावी वादे 100 प्रतिशत पूरे किए है तो हम मुख्यमंत्री और उनके मंत्री से पूछ रहे है क्या हमारा गाँव पाकिस्तान में था जो हमे लाईट सड़क से वंचित रख दिया..


जिले के प्रभारी और ऊर्जा मंत्री हैं उसी जिले के वाशिंदे बीता रहे अंधेरे में रात
राजस्थान सरकार में मंत्री भवर सिह भाटी फिलहाल बाँसवाड़ा डूंगरपुर के पिछले साल भर से प्रभारी मंत्री है और सरकार में ऊर्जा मंत्री है बाँसवाड़ा जिले में ऊर्जा मंत्री भवर सिह भाटी के अब तब 30से 40 दौरे हो चुके है ग्रामीणों ने गांव में लाईट की समस्या को लेकर कोंग्रेस कार्यलय में भी ऊर्जा मंत्री भवर सिंह भाटी को अवगत करवाया था लेकिन फिर भी सरकार के ऊर्जा मंत्री भवर सिह भाटी के विभाग के अधिकारी मंत्री जी के आदेश को तवज्जो नही दिया या फिर मंत्री जी इन गाँव के लोगो की समस्या को नजर अंदाज कर चुके इसलिए तो गाँव के लोग दिन अस्त होते ही अंधेरी रात में जीव जंतु काट देने के डर से दुबक कर सो जाते है।आज भी गाँव के लोग आस लगाए बैठे है कि सरकार राहत केम्प लगा रही है ताकि हमें भी राहत मिलेगी लेकिन सरकार में बैठे मंत्री विधायक इस गाँव की समस्या पर कितना सवेदनशील है वो इस गांव की तस्वीर अब तो चीख चीख कर सरकार और सरकारी सिस्टम से पूछ रही है।


गांव में ना लाईट है ना है पक्की रोड
बारी ग्राम पंचायत के 100 घरों की आबादी वाले इस गाँव मे ना आज दिन तक लाईट आई ना बनी पक्की डामरीकरण सड़क देश को आजाद हुए 75साल होने को है लेकिन आज भी इस गांव के वाशिंदे लाइट के बल्ब देखने को तरस रहे हैं महंगाई के इस दौर में मीठे तेल से दीपक जलाकर जैसे तैसे खाना बनाकर खाते है जबकि किरोसीन तेल तो सरकार कब से बंद कर चुकी है। गांव में करीब सैकड़ों बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए इसी उबड़ खाबड़ रोड़ से स्कूल जाते है इस आस में कि में भी कभी बड़ा अधिकारी बनुगा और इस गाँव कि समस्या का निवार्ण करूँगा।


स्थानीय प्रधान संगीता मीणा की भी अनदेखी
स्थानीय प्रधान संगीता मईडा जो वर्तमान में छोटी सरवन पंचायत समिति की प्रधान है संगीता महिला ने भी साल 2021 में पंचायत समिति सदस्य का चुनाव इसी ग्राम पंचायत से लड़ा था और चुनावी सभा मे गाँव के विकास का वादा भी किया था,ग्रामीणों ने गाँव मे विकास होंगा इस आस पर उमीदबार संगीत मईड़ा को भरपूर आशीर्वाद दिया और संगीता पँचायत समिति सदस्य का चुनाव जीत छोटी सरवन पंचायत समिति की प्रधान भी बनी लेकिन उस गांव के लोगों को किए विकास के वादे आज भी जस के तस है ग्रामीण अब भी प्रधान संगीता मईड़ा से पूछ रहे हैं कि हमारे गांव में लाइट कब आएगी और कब हम उजियारे में अपना ओर अपने बच्चो के भविष्य के अंधकार से छुटकारा पाएंगे।।

आज दिन तक नही पहुंची इस गांव में 108
आजादी 75 साल बीत चुके हैं और देश अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन आजाद भारत का एक ऐसा गांव जहां आज भी 108 वाहन नहीं पहुंची क्योंकि इस गांव में पहुंचने के लिए और रोड नहीं है जिसके चलते इस गांव में 108 आज दिन तक नहीं पहुंच पाई है गांव के लोगों ने बताया कि गांव में जब कोई बीमार होता है या फिर किसी महिला की डिलीवरी होती है तो उसे चारपाई पर सुलाकर करीब 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं तब जाकर वाहन और चिकित्सा सुविधा उपलबंद होती है। कई बार तो मरीज विश्राम में दम तोड़ चुके हैं तो वहीं कई बार बीच राह में महिलाओं की डिलीवरी भी हो चुकी है काश हमारे गांव में रोड होती तो शायद आज इस आजाद भारत में इस गांव की तकदीर तस्वीर ऐसी नहीं रहती।


सरकार के राहत कैंप का करेंगे विरोध
छोटी सरवन पंचायत समिति के ग्राम पंचायत बारी के वाह गांव के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है ग्रामीणों ने बताया कि सरकार राहत कैंप लगा रही है और हमारे को कोई सुविधा नहीं दे रही है गांव में लगने वाले इस कैंप का हम विरोध करेंगे नहीं तो सरकार हमारे गांव में लाइट और सड़क की पूर्ण व्यवस्था कर दे अगर सरकार समय पर नहीं करती है तो हम राहत कैंप शिविर का विरोध करेंगे।

आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार और गांव में किसी भी पार्टी के नेता को नहीं घुसने देने की चेतावनी
ग्रामीणों ने बताया कि देश को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं लेकिन हम आज भी इन नेताओं के गुलाम हैं क्योंकि चुनाव के समय आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं लेकिन नेताओ का मकसद पूरा होने के बाद मुड़कर तक नही देखते कि गांव के लोग किन हालातों में रहते होंगे लेकिन अब ग्रामीणों ने भी नेताओं को खुली चुनौती दी है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह चुनाव का भी बहिष्कार करेंगे और गांव में किसी भी पार्टी के नेता को घुसने नहीं देंगे जब तक उनके गांव की समस्या का समाधान नही हो।


चिमनी के उजियारे के सहारे युवाओं का भविष्य
गांव में पढ़ने वाले बच्चे के माता-पिता ने बताया कि हमारे बच्चे उबर खबर रोड पर चलकर स्कूल तक पहुंचते हैं अपने भविष्य को अंधेरे से उजाले की ओर करने के लिए लेकिन हमारे बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं इसके बाद तो गांव में लाइट है नहीं शाम होने के बाद बच्चे दीपक के उजियारे से निकलती लो के सहारे अपने भविष्य सुधारने में लगे है।कब सरकार जागेगी और कब गांव में मूलभूत जरूरत की पूर्ति होंगी।

महिला बोली पिहर में जाते हैं तो बल्ब देखते हैं
वाक गांव की एक महिला बोली कि शादी किए हुए 50 साल हो गए लेकिन मेरे ससुराल में आज दिन तक मैंने बल्ब जलता हुआ नहीं देखा मैं अपने पीहर जाती हूं तो मेरे पीहर में लाइट का जलता हुआ बल्ब देख सोचती हूं कि काश मेरे ससुराल में भी ऐसा लाइट का बल्ब होता तो मैं भी कूलर पंखे की हवा में रहती और लाइट में अपने बच्चों को पढ़ाती।


ये है सरपंच बहादुर सिंह मईड़ा का कहना
बारी ग्राम पंचायत सरपंच बहादुर सिंह मईड़ा ने बताया की गांव में लाईट पानी और बिजली की समस्या देश आजाद होने के बाद से आज भी बनी हुई है मैंने कई बार ग्राम पंचायत कि मीटिंग में प्रस्ताव लेकर विद्युत विभाग के अधिकारी और छोटी सरवन एसडीएम, जिला कलेक्टर महोदय सहित स्थानीय मंत्री अर्जुन सिंह बामणिया जी को भी अवगत करवाया है पहले इस गांव में वन विभाग से स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से विभाग के अधिकारी लाइट लगाने से मना कर रहे थे लेकिन अभी तो स्वीकृति मिले भी 2 माह हो गए और विद्युत विभाग के आला अधिकारियों को अवगत भी करवाया है लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारियों ने इस पर कोई अमल नहीं किया है वाक गांव में जब भी जाता हूं लोग मुझे घेर लेते हैं और पूछते हैं कि कब हमारे गांव में लाइट आएगी और कब हमारे गांव में रोड आएगी मुझे वहां से मजबूर होकर लोगों को आश्वासन के साथ निकल कर आना पड़ता है मैंने मेरी तरफ से पूर्ण प्रयास किए हैं लेकिन कहीं ना कहीं विद्युत विभाग के कर्मचारियों की इसमें साफ तौर पर लापरवाही दिख रही है जिसके चलते लोग अब नाराज हैं।


8 दिन में सरकार ने हमारी मांगों को नहीं सुना तो करेंगे जिला कलेक्ट्री का घेराव
आज ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि सरकार अगर हमारी मांगे 8 दिन में नहीं सुनी तो हम गांव के सभी लोग एकत्रित होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्ट्री का घेराव करेंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी