इस मासूम के लिए मां यशोदा बनी महिला कॉन्स्टेबल, दूध पिलाकर बचाई जान
माँ की ममता ईश्वर का वरदान है, सच पूछो तो मां, इन्सान नहीं भगवान है, एक महिला की ममता जब जागती है तो वो अपना पराया नहीं देखती बल्कि अपनी ममता न्यौछावर कर देती है, एक बच्चे की तड़प देखकर दो मांओं की ममता ऐसी जागी कि उन्होने अपनी ड्यूटी के साथ-साथ ममतामयी मां का होने का फर्ज भी बखूबी निभाया है।राजस्थान के बारां जिले में पुलिस विभाग में तैनात 2 महिला कांस्टेबलों ने मानवीयता की एक नई इबारत लिखी है, इन महिला कांस्टेबलों ने भूख प्यास से तड़पती एक ढाई माह की बच्ची को अपना दूध पिलाकर उसकी जान बचाई है,
दरअसल, बारां जिले की सारथल पुलिस को सूचना मिली कि एक शख्स नशे की हालत में जंगल की तरफ जा रहा है और उसकी गोद में एक बच्ची भी है, सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो वो शख्स झाड़ियों में घुसा हुआ मिला और बच्ची गर्मी से बेहाल अचेत अवस्था में मिली, बच्ची की हालत देखकर कांस्टेबल मुकलेश ने उसे तुरन्त सीने से लगा लिया, ढाई माह की बच्ची को लेकर जब पुलिसकर्मी थाने पहुंचे तो भूख प्यास से तड़पती बच्ची की हालत देखकर थानाधिकारी से लेकर हर एक जवान चिंतित हो गया, बच्ची की हालत देखते हुए महिला कांस्टेबल मुकलेश और पूजा की ममता जाग उठी उन्होंने बारी-बारी अपने आंचल में छिपाकर मासूम की भूख मिटाई, नशेड़ी युवक से पूछताछ में सामने आया कि उसका नाम राधेश्यान काथोड़ी है वो अपने ससुराल झालावाड़ जिले के कामखेड़ा से सुबह 5 के करीब बच्ची को लेकर पैदल रवाना हो गया था,

वहीं पुलिस ने बच्ची की मां को इसकी सूचना दी और जब तक उसकी मां नहीं पहुंची तब तक बच्ची को अपना दूध पिलाकर उसकी भूख शांत करवाई, महिला कांस्टेबल मुकलेश और पूजा ने बताया कि भूख की वजह से बच्ची की हालत बहुत खराब लग रही है, उसके होठ सूखे हुए थे, इतनी छोटी बच्ची को ऊपर का कुछ खिला-पिला नहीं सकते थे, हम दोनों के भी एक-एक साल के बच्चे है, उस बच्ची को भूख से तड़पता देख लगा कि जान पर ना बन आए इसलिए हमने बारी-बारी उसे अपना दूध पिलाया, ईश्वर की यही गरिमा थी कि एक अनजान आदिवासी बच्ची ने हमारा दूध पिया है,पुलिसकर्मी महिलाओं के इस नए अवतार की हर तरफ प्रशंसा हो रही है।





