इस वजह से मनाए जाते है शारदीय नवरात्र, जानें शुभ मुर्हूत और पूजाविधि
हिंदू धर्म में एक साल के अंदर दो पर्व के रूप में नवरात्र को मनाया जाता है लेकिन दोनों को मनाने के पीछे की कहानी बहुत कम लोगों को पता है। लेकिन आज हम आपको शारदीय नवरात्र की वह कहानी बताने जा रहे है जो पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। नवरात्र के पावन दिनों में मां के भक्त हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते है।
शास्त्रों में नवरात्र पर्व मनाने की दो पौराणिक कथाएं हैं। प्राचीन समय में महिषासुर नाम का एक राक्षस ब्रह्माजी का बड़ा भक्त था। उसने ब्रह्माजी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान मांगा जो पूरी पृथ्वी के लिए विनाशकारी साबित हुआ। इसके बाद उसने तीनों लोकों में आतंक माचना शुरू कर दिया क्योंकि उसको इंसान और देवता के साथ कोई नहीं मार सकता था।
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लेकिन इसके बाद उसके आतंक से परेशान होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ मिलकर मां शक्ति के रूप में दुर्गा को जन्म दिया। इसके बाद मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक युद्ध हुआ और दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसके आंतक से मुक्ति दिलाई।
दूसरी पौराणिक कथा भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। जब श्री राम ने लंका पर आक्रमण किया उससे पहले युद्ध जीतने के लिए शक्ति की देवी मां भगवतीजी की आराधना की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने श्रीराम को लंका में विजय प्राप्ति का आशीर्वाद दिया।

इसके बाद 9 दिन तक युद्ध हुआ और 10वें दिन यानि विजयदशमी के दिन रावण का वध किया था। इन दोनों कथाओं में मां के 9 रूपों की पूजा का चलन शुरू हुआ और हर साल रावण का वध करके संदेश दिया जाता है कि बुराई का अंत होगा सत्य की जीत होगी।





