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सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज के दिव्य प्रवचनों से मंत्रमुग्ध हुए SDRF के जवान

प्रकाशित: May 14, 2022 19:13रिपोर्ट: Navtej TV

तीन दिन के जयपुर प्रवास पर पधारे परम् पूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी ने आज सुबह एसडीआरएफ मुख्यालय जयपुर में "मोटिवेशनल व स्ट्रेस प्रबंधन सेमिनार" को संबोधित करते हुए समस्त पुलिस अधिकारियों का मार्गदर्शन किया। SDRF चीफ पंकज चौधरी ने महाराज का माला पहनाकर स्वागत किया और आर्शिवाद लिया। इस दौरान उन्होंने सेमिनार में मौजूद लोागें को जीवन जीने का असली उद्देश्य बताते हुए उन्हें तनाव से मुक्त होकर जीने का मार्ग बताया जिसे सुनकर सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

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इस दौरान उन्होंने कहा कि SDRF के जवान बहुत अच्छा काम करते है और आपदा के समय वह लोगों की जान बचाने वाले किसी भगवान से कम नहीं होते है। लेकिन जवान किसी ना किसी बात को लेकर तनाव में रहते है तो उनको इससे बचने के लिए हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भगवान ने भी एक साथ दो जिम्मेदारी निभाते हुए और हसंते हुए कष्टों का सामना किया था। इसी वजह से उनका पूरा जीवन मनुष्य पीढ़ी के लिए प्रेरणा है इसी वजह से आपको हंसते हुए जीवन का व्यापन करना चाहिए।


महाराज ने ज्ञान और विज्ञान की असली परिभाषा बताते हुए कहा जो लोग अपने आपको ताकतर समझते है उनको पता होना चाहिए कि इस संसार को बनाने वाले के आगे वह कुछ भी नहीं है। विज्ञान का आविष्कार मनुष्य ने किया है लेकिन ज्ञान का अर्थ पूरा ब्रह्मांड है और उसकी शक्ति का अनुमान लगाना किसी के बस की बात नहीं है।

कर्म ही पूजा है और लोग इसका गलत अर्थ निकलाते है। मनुष्य को अपने प्रति ईमानदार होना चाहिए क्योंकि उसके बारे में उससे ज्यादा कोई नहीं जान सकता। कई लोग नौकरी करते है केवल परिवार चलाने के लिए लेकिन कुछ लोग ही अपनी इच्छा से और खुश होकर नौकरी कर रहे हैं। अगर आप खुश होकर काम करेंगे तो आपके जीवन से तनाव हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने आज सुबह क्रिकेट मैच के दौरान कहा कि मैच तो पंकज चौधरी की टीम जीतेगी लेकिन इसका जवाब पंकज चौधरी ने दिया वह बहुत ही अच्छा था। पंकज चौधरी ने कहा जीत किसी भी टीम की हो दोनों मेरी है कहा तो इस बात से पता चलता है कि वह इस विभाग को अपने परिवार की तरह मानते हैं।


अंत में उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को पढ़ लिखकर इतना घमंड हो जाता है कि वह अपने आपको बहुत बड़ा मानने लग जाते है। लेकिन उनको इस बात का पता नहीं है कि जो शिक्षा ली है उससे केवल आपको नौकरी मिलेगी इससे ज्यादा कुछ नहीं क्योंकि मैकाले की शिक्षा भारत में इसी वजह से लागू की गई थी।