इस इंजीनियर ने बसाई थी देवी-देवताओं की नगरी, जानें इनकी पूरी कहानी
17 सितंबर यानी आज विश्वकर्मा जयंती है और इनको दुनिया का सबसे बड़ा इंजीनियर कहा जाता है। ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का निर्माण किया लेकिन इसे सजाने-संवारने का काम विश्वकर्मा जी ने बड़ी अच्छी तरह से किया था। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार देवी-देवताओं के भव्य महल और रथों के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। सोने की लंका को भी विश्वकर्मा ने बनाई थी।
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भगवान शिव के साथ पार्वती वैकुण्थ गईं तो वह वहां की सुंदरता देख मंत्रमुग्ध हो गईं और फिर ऐसा ही एक सुंदर महल बनवाने की मांग की तो तब भगवान शिव ने ही विश्वकर्मा से सोने का महल बनवाया था। लेकिन रावण ने शिवजी से दान में सोने की लंका मांगी थी।

शिव ने वरदान दिया लेकिन पार्वजी जी को इसका पता चला तो वह गुस्सा हो गई और उन्होंने श्राप दिया कि यह महल आग जलकर भस्म हो जाएगा।श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार, विश्वकर्मा जी ने द्वारिका का भी निर्माण किया था। भगवान शिव के सोने के रथ का निर्माण भी किया था। बताया जाता है कि स्वर्ग लोक, इंद्रपुरी, द्वारिका,सोने की लंका, सुदामापुरी जैसे कई भव्य नगर और स्थानों का निर्माण अपने हाथों से किया था।





