राजस्थान के खनन पट्टाधारकों को बड़ी राहत
राजस्थान सरकार ने खनन पट्टाधारकों को बड़ी राहत देते हुए खनन नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के तहत अब मेजर मिनरल (प्रधान खनिज) के पट्टाधारक अपनी लीज क्षेत्र में मिलने वाले माइनर मिनरल (अप्रधान खनिज) को भी मौजूदा माइनिंग लीज में शामिल करवा सकेंगे। इसके लिए सरकार ने राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017 में संशोधन करते हुए राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 लागू किए हैं।
मुख्य बातें
- नए खनिज के लिए ऑनलाइन आवेदन होगा।
- मेजर लीज में माइनर मिनरल जुड़ सकेगा।
- मेजर लीज में माइनर मिनरल जुड़ सकेगा।
राजस्थान में खनन पट्टाधारकों को बड़ी राहत, मेजर मिनरल लीज में शामिल होगा माइनर मिनरल
राजस्थान सरकार ने खनन पट्टाधारकों को बड़ी राहत देते हुए खनन नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के तहत अब मेजर मिनरल (प्रधान खनिज) के पट्टाधारक अपनी लीज क्षेत्र में मिलने वाले माइनर मिनरल (अप्रधान खनिज) को भी मौजूदा माइनिंग लीज में शामिल करवा सकेंगे। इसके लिए सरकार ने राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017 में संशोधन करते हुए राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 लागू किए हैं।
30 दिन में देनी होगी खनिज मिलने की सूचना
नए जोड़े गए नियम 26सी के तहत यदि किसी मेजर मिनरल की लीज क्षेत्र में ओवरबर्डन या साधारण मिट्टी के अलावा कोई नया माइनर मिनरल मिलता है, तो पट्टाधारक को इसकी सूचना 30 दिन के भीतर संबंधित खनि अभियंता या सहायक खनि अभियंता को देनी होगी।
नए खनिज को आधिकारिक रूप से माइनिंग लीज में शामिल किए जाने तक उसका खनन या निस्तारण नहीं किया जा सकेगा।
ऑनलाइन आवेदन और तय समय में होगी मंजूरी
नए माइनर मिनरल को लीज में शामिल कराने के लिए पट्टाधारक को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद खनि अभियंता को एक महीने के भीतर प्रस्ताव निदेशालय को भेजना होगा।
इसके बाद निदेशालय भारतीय खान ब्यूरो (IBM) से परामर्श कर एक महीने के भीतर प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा। सरकार प्रस्ताव मिलने के 30 दिनों के भीतर खनिज को लीज में शामिल करने की अनुमति देगी। आवेदन खारिज होने पर उसके कारण लिखित रूप में आवेदक को बताए जाएंगे।
डेड रेंट और वन टाइम प्रीमियम का भी नियम
नई व्यवस्था के तहत पट्टाधारक को मेजर या माइनर मिनरल में से जिस खनिज का डेड रेंट अधिक होगा, उसका भुगतान करना होगा। प्रत्येक खनिज के लिए अलग-अलग डेड रेंट नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा मौजूदा डेड रेंट और नए शामिल होने वाले खनिज के डेड रेंट में से जो अधिक होगा, उसकी दोगुनी राशि वन टाइम प्रीमियम के रूप में जमा करनी होगी। यह राशि डेड रेंट या रॉयल्टी में समायोजित नहीं की जाएगी।
पट्टाधारक को निर्धारित दरों के अनुसार रॉयल्टी के साथ डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (RSMET) में भी अंशदान देना होगा।
नियम 12 और 52 में भी संशोधन
सरकार ने संशोधन के जरिए राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017 के नियम 12 के उप-नियम (6) और नियम 52 के उप-नियम (2) को भी हटा दिया है।
इस बदलाव से एक ही लीज क्षेत्र में अलग-अलग खनिज मिलने की स्थिति में पट्टाधारकों के लिए उन्हें लीज में शामिल कराने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और समयबद्ध हो गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नियमों में बदलाव किसने किया?
राजस्थान सरकार ने।
वन टाइम प्रीमियम कितना होगा?
अधिक डेड रेंट की दोगुनी राशि।





