शेखावाटी की 14 ऐतिहासिक हवेलियां यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल, वर्ल्ड हेरिटेज का रास्ता साफ
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की 14 ऐतिहासिक हवेलियों और क्षेत्रों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के अनुसार, इससे इन प्राचीन भित्तिचित्रों और स्थापत्य कला से जुड़ी धरोहरों को वैश्विक पहचान मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बातें
- शेखावाटी की 14 हवेलियों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में जगह मिली है
- इस सूची में सीकर, चूरू, झुंझुनू, मंडावा और फतेहपुर समेत 14 क्षेत्र शामिल हैं
- उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी दी है
- इन हवेलियों को उनकी अनूठी स्थापत्य कला और भित्तिचित्रों के लिए जाना जाता है
राजस्थान के शेखावाटी अंचल की 14 ऐतिहासिक हवेलियों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में जगह मिल गई है। इसे इन धरोहरों को आधिकारिक वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी कि क्षेत्र की इन प्राचीन इमारतों की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने वाले इन 14 क्षेत्रों में अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनू, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर शामिल हैं। इन सभी स्थानों की हवेलियां अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और दीवारों पर उकेरे गए भित्तिचित्रों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं।
ओपन आर्ट गैलरी के रूप में पहचान
शेखावाटी की इन हवेलियों की दीवारों, छतों और मेहराबों पर उकेरे गए रंगीन चित्र तत्कालीन समाज, संस्कृति और जीवनशैली का जीवंत दस्तावेज हैं। इन कलाकृतियों में धार्मिक प्रसंगों के साथ-साथ राजघरानों के दौर, व्यापार, ग्रामीण परिवेश और उस समय के सामाजिक ताने-बाने की झलक मिलती है। अपनी इसी खासियत के कारण शेखावाटी क्षेत्र को दुनिया भर में खुली कला दीर्घा यानी ओपन आर्ट गैलरी के रूप में जाना जाता है।
दीवारों पर उकेरी गई ये सदियों पुरानी चित्रकारी देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। जानकारों का मानना है कि यूनेस्को की इस शुरुआती सूची में नाम आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन धरोहरों के प्रति पर्यटकों का आकर्षण और बढ़ेगा।
आगे की प्रक्रिया और संरक्षण के प्रयास
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में किसी स्थल का नाम शामिल होना अंतिम मंजूरी नहीं होता, बल्कि यह मुख्य सूची में दावेदारी का एक जरूरी चरण है। इसके बाद इन 14 ऐतिहासिक क्षेत्रों को वैश्विक धरोहर का पूर्ण दर्जा दिलाने के लिए नामांकन डोजियर और संरक्षण से जुड़ी आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इस उपलब्धि पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विरासत भी, विकास भी' के विजन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक थाती के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।
पर्यटन और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि यदि शेखावाटी की इन हवेलियों को अंतिम यूनेस्को सूची में जगह मिल जाती है, तो क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही में बड़ा इजाफा होगा। वैश्विक फलक पर पहचान मिलने से क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। फिलहाल, इस शुरुआती सूची में नाम दर्ज होना शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी सफलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शेखावाटी की कितनी हवेलियों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है?
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की 14 ऐतिहासिक हवेलियों और क्षेत्रों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है।
टेंटेटिव लिस्ट में शेखावाटी के कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इस सूची में अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनू, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर की हवेलियां शामिल हैं।
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने का क्या मतलब है?
टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना किसी ऐतिहासिक स्थल को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिलने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है, हालांकि यह अंतिम मंजूरी नहीं है।
शेखावाटी की हवेलियां किस कला के लिए प्रसिद्ध हैं?
शेखावाटी की हवेलियां अपनी अनूठी स्थापत्य कला और दीवारों, छतों तथा मेहराबों पर बने रंगीन भित्तिचित्रों के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं।



