कान्हा की गोवेर्धन लीला का हर कोई हैं दीवाना..
कहते हैं कि हर त्यौहार के पीछे कुछ ना कुछ कहानी अवश्य होती हैं चाहें वो होली हो या दिवाली...दीपोत्सव के चौथे दिन बनाये जाने वाले गोवेर्घन पर्व के पीछे जुडी कान्हा की इस नटखट लीला का हर कोई दीवाना हैं|पर दिवाली के अगले दिन होने वाले गोवेर्धन पूजा के पीछे पौराणिक मान्यता क्या हैं क्या आप जानते हैं? आइये आपको बताते हैं
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हिंदू धर्म के अनुसार भगवान कृष्ण ने इंद्र देवता के अंहकार को तोड़ने के लिए ब्रजवासियों के साथ गोवेर्धन की पूजा की इसके पश्चात देवराज इंद्र क्रोधित होकर मूसलाधार बरसा करने लगे और चारो तरफ हाहाकार मच गया. इंद्र के प्रकोप से गाय और ब्रजवासियों को बचाने के लिए मुरलीधर कन्हैया ने कनिष्ठा पर सम्पूर्ण गिरिराज गोवेर्धन को धारण कर लिया. फिर सभी गोकुलवासियों ने गोवेर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, उस दौरान भी इन्द्रदेव ने कई अस्त्र- शस्त्रों का प्रयोग किया,लेकिन सभी निष्फल प्रयासों के बाद भी इन्द्रदेव गोकुलवासियों को कोई भी क्षति नहीं पुहंचा पाए, इसी के बाद गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परम्परा प्रारम्भ हुयी और कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवेर्धन पर्वत की पूजा की जाती हैं|

ऐसे बनाइये गोवेर्धन-
गोवेर्धन पर्वत बनाने के लिए गाय या भैस का गोवर ले और छड़ी की सहायता से नाक, आँख, मुंह का आकार दे , आकृति सूख जाने पर उस पर मुकुट और कपडे पहनाकर सजा सकते हैं. चारों तरफ रंग-विरंगे फूलों से सजा दें और खील पताशे और खिलौने भी चढा दें|
जानिये शुभ मुहूर्त-
पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 26 अक्टूबर 2022 को प्रात: 06:26 से प्रातः08:40 बजे तक रहेगा और पूजा की अवधि 2 घंटे 15 मिनट होगी। प्रतिपदा तिथि 25 अक्टूबर 2022 को शाम 4:18 बजे से शुरू होकर 26 अक्टूबर 2022 को दोपहर 2:42 बजे समाप्त होगी।





