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सरकारी नौकरी से पहले होगी नई जांच

प्रकाशित: Jul 17, 2026 14:54रिपोर्ट: Monika Rathore

राजस्थान में सरकारी नौकरी के लिए दिव्यांग कोटे का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और पहले से कार्यरत कर्मचारियों के लिए सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी गयी है। दिव्यांग प्रमाण पत्रों में सामने आ रही गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए अब किसी भी सामान्य अस्पताल का दिव्यांग प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होगा। राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों में विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड गठित करने का फैसला किया है। इन बोर्डों में असिस्टेंट प्रोफेसर या उससे वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल होंगे और सभी मेडिकल कॉलेजों को दिव्यांगता का आकलन करने के लिए तय मानकों के अनुसार आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। जांच के दौरान संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे..

नई व्यवस्था के तहत अब सभी भर्ती परीक्षाओं में आवेदन करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए वैध कार्ड होना अनिवार्य होगा। राजस्थान लोक सेवा आयोग राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड समेत सभी भर्ती एजेंसियां अपने विज्ञापनों में स्पष्ट उल्लेख करेंगी कि चयनित अभ्यर्थियों की दिव्यांगता की अंतिम जांच केवल संभागीय मुख्यालयों पर बने नए मेडिकल बोर्ड द्वारा ही की जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी के पास पहले से दिव्यांग प्रमाण पत्र है, तब भी सरकारी नौकरी के लिए उसकी पात्रता का अंतिम निर्णय नए बोर्ड की मेडिकल जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर ही होगा

सरकार ने पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों और अधिकारियों के पुनः सत्यापन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि पुनः जांच के दौरान दिव्यांगता के प्रतिशत में कोई अंतर सामने आता है, तो कर्मचारी की पात्रता और आरक्षण का निर्धारण उसके चयन के समय लागू मेडिकल मानकों के अनुसार ही किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई अभ्यर्थी या कर्मचारी प्रारंभिक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट या दिव्यांगता प्रतिशत से संतुष्ट नहीं है, तो उसे अपील करने का अधिकार भी मिलेगा। इसके लिए प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर अपीलीय दिव्यांगता सत्यापन मेडिकल बोर्ड बनाया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता एडिशनल प्रिंसिपल या मेडिकल अधीक्षक करेंगे और इसमें प्रारंभिक बोर्ड से वरिष्ठ डॉक्टर शामिल होंगे। सरकार के मुताबिक इस नई व्यवस्था का उद्देश्य दिव्यांग आरक्षण में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाना और सरकारी नौकरियों का लाभ केवल वास्तविक पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों तक सुनिश्चित करना है।