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विलुप्ति की कगार पर मालवी ऊंट

देश में तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रही मालवी ऊंट नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ने विशेष अभियान शुरू किया है। देश की मान्यता प्राप्त नौ ऊंट नस्लों में शामिल मालवी ऊंट की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी नस्ल में मादा ऊंटों की संख्या 300 से कम होने पर उसे संकटग्रस्त माना जाता है, जबकि वर्तमान में मेवाड़ी, मेवाती और मालवी नस्ल इसी श्रेणी में हैं।

प्रकाशित: Jul 27, 2026 18:24रिपोर्ट: Monika Rathore

मुख्य बातें

  • पशुधन गणना-2019 के अनुसार देश में मालवी ऊंट नस्ल के केवल 102 ऊंट बचे हैं।
  • एनआरसीसी ने मालवी ऊंट के संरक्षण के लिए 12 ऊंट खरीदे हैं, जिनमें 3 नर और 9 मादा शामिल हैं।
  • मालवी ऊंट देश की सबसे छोटे कद वाली ऊंट नस्ल मानी जाती है और इसकी पहचान इसका सफेद रंग है।

मालवी ऊंट नस्ल को बचाने के लिए विशेष अभियान, एनआरसीसी ने शुरू किया शुद्ध प्रजनन कार्यक्रम

देश में तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रही मालवी ऊंट नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ने विशेष अभियान शुरू किया है। देश की मान्यता प्राप्त नौ ऊंट नस्लों में शामिल मालवी ऊंट की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी नस्ल में मादा ऊंटों की संख्या 300 से कम होने पर उसे संकटग्रस्त माना जाता है, जबकि वर्तमान में मेवाड़ी, मेवाती और मालवी नस्ल इसी श्रेणी में हैं। पशुधन गणना-2019 के अनुसार देश में मालवी नस्ल के केवल 102 ऊंट ही शेष बचे हैं। इस स्थिति को देखते हुए एनआरसीसी ने 12 मालवी ऊंट, जिनमें तीन नर और नौ मादा शामिल हैं, खरीदकर वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है, ताकि आने वाले वर्षों में इस दुर्लभ नस्ल की संख्या बढ़ाई जा सके। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश के अनुसार यह कार्यक्रम वैज्ञानिक पद्धति से संचालित किया जा रहा है। मालवी ऊंट देश की सबसे छोटे कद वाली ऊंट नस्ल मानी जाती है और इसकी पहचान इसका लगभग पूरी तरह सफेद रंग है। यह नस्ल दूध उत्पादन के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि एक मादा ऊंट एक बार में लगभग 4 से 5 किलोग्राम दूध देने में सक्षम होती है। पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से भार ढोने और परिवहन कार्यों में किया जाता था। यह नस्ल मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के मंदसौर, नीमच, रतलाम और ग्वालियर के साथ राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिलों में पाई जाती है। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (करनाल) की नेटवर्क परियोजना के तहत एनआरसीसी किसानों और पशुपालकों को भी इस अभियान से जोड़ रहा है, ताकि वैज्ञानिक संरक्षण, जागरूकता और प्रजनन कार्यक्रमों के जरिए इस दुर्लभ ऊंट नस्ल को विलुप्त होने से बचाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देश में मालवी ऊंटों की संख्या कितनी बची है?

पशुधन गणना-2019 के अनुसार केवल 102 ऊंट।

एनआरसीसी ने कितने मालवी ऊंट खरीदे हैं?

12 मालवी ऊंट, जिनमें 3 नर और 9 मादा हैं।