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मध्य प्रदेश

एक डॉक्टर के भरोसे नागलवाड़ी का अस्पताल

प्रकाशित: Aug 31, 2026 18:24रिपोर्ट: Mr. Reporter

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक बेहद गंभीर खबर सामने आ रही है। एक तरफ बड़े-बड़े दावे हैं, चुनाव के समय किए गए वादे हैं, और दूसरी तरफ है ज़मीनी हकीकत। बड़वानी जिले के अंतिम छोर पर बसे नागलवाड़ी क्षेत्र में पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। यहाँ का मुख्य अस्पताल सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है, और जब वो डॉक्टर छुट्टी पर चले जाएं, तो पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे हो जाती है। बड़वानी जिले का नागलवाड़ी क्षेत्र कहने को तो यह एक बेहद महत्वपूर्ण इलाका है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बदहाल है। यहाँ के सरकारी अस्पताल में वर्षों से महज एक डॉक्टर का पद स्वीकृत है। सोमवार को जब यह एकमात्र डॉक्टर छुट्टी पर गए, तो अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे सैकड़ों मरीजों की सांसें अटक गईं। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं था। मजबूरन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों और निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा । गरीब आदमी कहाँ जाए? हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।"हैरानी की बात यह है कि यह वही नागलवाड़ी है, जहाँ अभी कुछ महीनों पहले मार्च 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद आकर राज्य की पहली ऐतिहासिक 'कृषि कैबिनेट' की बैठक ली थी। उस कैबिनेट बैठक में पूरी सरकार नागलवाड़ी के आंगन में बैठी थी और किसानों व क्षेत्र के विकास के लिए 27 हजार करोड़ से ज्यादा के महा-पैकेज की घोषणाएं की गई थीं। लेकिन आज जमीनी हकीकत देखिए, जिस पावन धरती पर सूबे के मुखिया ने वीआईपी बैठक की थी, वहाँ के स्थानीय लोग और प्रसिद्ध शिखरधाम मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालु एक अदद डॉक्टर के लिए तरस रहे हैं। अस्पताल में रोज़ाना 100 से 150 मरीजों की ओपीडी (OPD) होती है, मगर पूरी व्यवस्था एक ही डॉक्टर के कंधों पर छोड़ दी गई है।"जब मुख्यमंत्री जी की कैबिनेट बैठक यहाँ हुई थी, तो हमें लगा था कि नागलवाड़ी के दिन बहुरेंगे। बड़े-बड़े वीआईपी आए, घोषणाएं हुईं। लेकिन आज अस्पताल में एक डॉक्टर छुट्टी पर जाता है तो पूरा ताला लग जाता है। क्या सरकार को हमारी सेहत की कोई फिक्र नहीं है? यहाँ कम से कम दो डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति होनी ही चाहिए।"ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि आसपास के छोटे स्वास्थ्य केंद्रों पर तो दो-दो डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन नागलवाड़ी जैसे संवेदनशील, धार्मिक और महत्वपूर्ण क्षेत्र की लगातार अनदेखी की जा रही है। अगर समय रहते यहाँ अतिरिक्त डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को भी किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।जिस नागलवाड़ी से कुछ महीने पहले पूरे प्रदेश के विकास का खाका खींचा गया था, आज वही क्षेत्र अपनी बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए तड़प रहा है। ग्रामीणों की मांग बेहद जायज और साफ है—अस्पताल में कम से कम दो डॉक्टरों की स्थायी तैनाती तुरंत की जाए। अब देखना यह होगा कि क्या भोपाल में बैठी सरकार अपने इस 'कैबिनेट वेन्यू' की सुध लेती है, या फिर नागलवाड़ी के लोग इसी तरह एक डॉक्टर के भरोसे अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे।