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सावन पहला सोमवार 2026: 3 अगस्त को है सावन का पहला सोमवार, पूजा की थाली में जरूर रखें ये 10 पवित्र चीजें

साल 2026 में सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन महादेव की पूजा में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और सफेद फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।

प्रकाशित: Aug 02, 2026 19:49रिपोर्ट: HarshitaIndiaVerified

मुख्य बातें

  • साल 2026 में सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है।
  • पूजा में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध और बेलपत्र अर्पित करना आवश्यक है।
  • व्रत के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।

देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र सावन का महीना शुरू हो चुका है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन विधि-विधान से शिव जी की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। यदि आप भी सावन के पहले सोमवार का व्रत रख रहे हैं, तो पूजा की थाली में कुछ खास चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी माना गया है।

शिवलिंग पर अर्पित करने के लिए पवित्र चीजें

शिवलिंग की पूजा में जल और गंगाजल का विशेष महत्व है। भगवान शिव की आराधना का सबसे सरल माध्यम जल से अभिषेक करना है, जिससे मन शांत होता है और भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। साधारण जल में थोड़ा सा पवित्र गंगाजल मिलाकर अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

इसके अलावा, सावन सोमवार पर शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने की प्राचीन परंपरा है, जिससे घर-परिवार में आरोग्य का वास होता है। महादेव को बेलपत्र के तीनों दल अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए पूजा में हमेशा साफ, बिना कटे-फटे और अखंड बेलपत्र ही अर्पित करने चाहिए। विषैला होने के बावजूद धतूरा भगवान शिव को बेहद प्रिय है, जिसे चढ़ाने से सारे पाप और संताप हर लिए जाते हैं।

भांग, चंदन और शमी पत्र का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार भांग को भी शिव जी की पसंद की सामग्री माना गया है, जिसे सावन की पूजा में विशेष रूप से शामिल किया जाता है। शिवलिंग पर पीला या सफेद चंदन का लेप लगाने से पूजा पूर्ण मानी जाती है, जो शीतलता और मानसिक शांति का प्रतीक है। शनि के प्रकोप को शांत करने और महादेव की कृपा पाने के लिए शमी के पत्तों का भी बहुत महत्व है।

पूजा में मदार, चमेली और कनेर जैसे सफेद फूलों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि भोलेनाथ को ये अति प्रिय हैं। अनुष्ठान के अंत में भगवान को मौसमी फलों और शुद्ध मिठाई का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंदों में बांटा जाता है।

व्रत के नियम और पूजन विधि

सावन के पहले सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद साफ या हल्के रंग, विशेषकर सफेद या हरे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्' महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करना चाहिए, जिससे अकाल मृत्यु का भय टलता है। जलाभिषेक और पूजन के पश्चात शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें। व्रत रखने वाले पूरे दिन फलाहार रहें और मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न आने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

साल 2026 में सावन का पहला सोमवार कब है?

3 अगस्त