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अरावली को बचाने का मौका! अब आप भी रख सकते हैं अपनी बात

राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्राचीन अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और विकास को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी ने आम जनता और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित यह समिति राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली पर्वतमाला के पर्यावरण, जैव विविधता, अवैध खनन, वन संरक्षण और स्थानीय जनजीवन से जुड़े मुद्दों का व्यापक अध्ययन कर रही है।

प्रकाशित: Jul 21, 2026 19:01रिपोर्ट: Monika Rathore

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी ने अरावली संरक्षण को लेकर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
  • राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली पर्वतमाला के पर्यावरण और अवैध खनन से जुड़े मुद्दों का अध्ययन किया जा रहा है।
  • हितधारक अगले 21 दिनों के भीतर ईमेल या गूगल फॉर्म के माध्यम से अपने सुझाव और दस्तावेज जमा कर सकते हैं।

अरावली संरक्षण पर आम जनता से सुझाव मांगे, सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी ने शुरू की प्रक्रिया

राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्राचीन अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और विकास को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी ने आम जनता और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित यह समिति राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली पर्वतमाला के पर्यावरण, जैव विविधता, अवैध खनन, वन संरक्षण और स्थानीय जनजीवन से जुड़े मुद्दों का व्यापक अध्ययन कर रही है। समिति ने राजस्थान के ग्रामीणों, किसानों, माइनिंग लीज धारकों, खदान मजदूरों, पर्यावरणविदों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अगले 21 दिनों के भीतर ईमेल या गूगल फॉर्म के माध्यम से प्रमाणिक दस्तावेजों सहित अपने सुझाव और जमीनी फीडबैक भेजें। इन सुझावों के आधार पर समिति 31 अगस्त 2026 से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई 2026 को स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए इस हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया था। समिति का उद्देश्य अरावली क्षेत्र में अवैध खनन, वन कटाई और पर्यावरणीय क्षति की समीक्षा करते हुए ऐसा संतुलित समाधान तैयार करना है, जिससे एक ओर अरावली पर्वतमाला और उसके पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण सुनिश्चित हो सके, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका, कृषि, खनन उद्योग और रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसलिए पहली बार स्थानीय समुदायों और हितधारकों की राय को भी रिपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। अरावली संरक्षण पर आम जनता से सुझाव मांगे,

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अरावली संरक्षण के लिए सुझाव किसने मांगे हैं?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी ने सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

कौन-कौन लोग अपने सुझाव भेज सकते हैं?

ग्रामीण, किसान, माइनिंग लीज धारक, खदान मजदूर, पर्यावरणविद, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम नागरिक अपने सुझाव भेज सकते हैं।