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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: 4 सितंबर को मनेगी अष्टमी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। इस दिन मध्यरात्रि पूजा का विधान है और मान्यता है कि इससे शनि के दोष भी शांत होते हैं।

प्रकाशित: Aug 28, 2026 17:21रिपोर्ट: HarshitaIndiaVerified

मुख्य बातें

  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी
  • अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2:25 बजे से शुरू होगी
  • अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर को रात 12:13 बजे होगा
  • कृष्ण पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभाव कम होते हैं

हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि को मनाया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से न केवल भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि शनि के दुष्प्रभावों से भी राहत मिलती है।

शुभ मुहूर्त और तिथि की गणना

पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होगी और इसका समापन 5 सितंबर को रात 12:13 बजे होगा। श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को हुआ था, इसलिए इस पर्व पर रात के समय की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद यह पावन पर्व आता है। वैसे तो हर महीने कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि आती है, लेकिन भाद्रपद मास की अष्टमी का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।

शनि दोष से मुक्ति का संयोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण की उपासना से शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि शनि की साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जन्माष्टमी का दिन बेहद खास माना गया है।

श्रीमद्भागवत में 'कृष्ण' शब्द का उल्लेख काले रंग के आशय से भी जोड़ा गया है। इसके साथ ही कृष्ण को मोक्ष प्रदाता भी कहा गया है। इसी तरह शनिदेव भी कृष्ण वर्ण के हैं और न्याय के देवता होने के साथ-साथ मोक्षदायक माने जाते हैं। यही वजह है कि जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल की पूजा करने से शनि का कोप भी शांत होता है।

पूजा और अनुष्ठान के नियम

जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की षोडशोपचार पूजा करते हैं। मान्यता है कि पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ की गई पूजा से सभी प्रकार के सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। मध्यरात्रि में भगवान के बाल रूप को कन्हैया के रूप में पालने में झुलाया जाता है और पंजीरी व मक्खन का भोग लगाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?

साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि कब से कब तक है?

अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी।

क्या जन्माष्टमी की पूजा से शनि दोष कम होता है?

हां, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण की उपासना से शनिदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभाव कम होते हैं।