राजस्थान बनेगा देश का सोलर पावर बैंक ग्रीन पावर की ओर बढ़ता राजस्थान
राजस्थान अब केवल सौर ऊर्जा उत्पादन में ही नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भी देश का नया पावर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार ने सितंबर 2026 तक 1000 मेगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है, जबकि वर्ष 2027 तक इसे बढ़ाकर 6000 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। पश्चिमी राजस्थान में सालभर लगभग 325 दिनों तक तेज धूप रहने के कारण यहां बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है, लेकिन मांग कम होने पर काफी बिजली का उपयोग नहीं हो पाता। अब बैटरी स्टोरेज सिस्टम के जरिए इस अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखा जाएगा और शाम व रात के पीक आवर्स में ग्रिड के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इससे प्रदेश में चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल होगी साथ ही कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा, ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी और बिजली कटौती की संभावना भी काफी कम होगी शुरुआत बीकानेर से की जाएगी जबकि आगे जैसलमेर और जोधपुर में भी बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं विकसित करने की योजना है। दूसरी ओर, घरों में लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम के साथ लिथियम आधारित बैटरियों का उपयोग भी तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिससे दिन में तैयार हुई सौर ऊर्जा का उपयोग रात के समय भी किया जा सकेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक बैटरी स्टोरेज तकनीक भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यवस्था है और यह राजस्थान को केवल देश का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि 'राउंड-द-क्लॉक ग्रीन पावर' उपलब्ध कराने वाला अग्रणी राज्य भी बनने में अहम भूमिका निभाएगा।





