राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जो तकरार चल रही है वह दिल्ली आलकमान के लिए सिर दर्द बनी हुई है। राजस्थान के कई नेता दबी जुबा में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अपनी बात रख रहे हैं और इसी वजह से आलाकमान अब इस मामले में ज्यादा ढिलाई नहीं बरतना चाहता है। राजस्थान में कांग्रेस को 2023 में वापसी करनी है तो कई राज्यों में अगले साल चुनाव है तो वह नहीं चाहती है कि पार्टी में किसी प्रकार की गुटबाजी होती रहें।
17 दिसंबर को गहलोत सरकार को तीन साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है लेकिन यह कार्यकाल बहुत ही उतार चढाव भरा रहा है। अगर पायलट गुट से किया गया वादा जल्द पूरा नहीं होता है तो यह कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं होगा क्योंकि पायलट का प्रभाव राजस्थान के साथ दूसरे राज्यों में भी है। यूपी चुनावों में प्रियंका के साथ पायलट अहम रोल में नजर आ सकते हैं क्योंकि यूपी में पायलट की लोकप्रियता कांग्रेस के लिए वोटों में बदल सकती है।
