भले ही यह घटना तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के समय की क्यों ना हो लेकिन आज भी सभी के रोंगटे खड़े कर देती हैं, कहानी एक ऐसी जो दिल दहला दें. कहते हैं एक रात क्या-क्या नहीं बदल देती ऐसी ही एक अँधेरी रात ने सब कुछ बदल दिया ,मानो हँसते खेलते परिवारों पर ग्रहण सा लग गया, यह बताते हुए मेरी आवाज आज भी थरथराती हैं वो सैकड़ों की भीड़, सबके हाथों में लाठी-तलवार और मशालें...यह किस्सा हैं सन 1984 के दंगों का, जब जनरेल सिंह भिन्डरवाले कि सुलगाई खालिस्तान कि आग पूरे देश में फ़ैल चुकी थी लोग मर रहे थे, सरे आम लोगो को गोलियों से भूना जा रहा था, इसी कहानी का एक पन्ना हम आपके सामने खोल रहे है. पहले लाठियों से पीटना और फिर जलते हुए टायर को माला के समान गले में डाल देना, उन्होंने चुन- चुन कर परिवार के पुरुषों को दर्दनाक तरीके से मौत दी, जिस पिता से हम डरते थे वो हाथ जोड़कर ज़िन्दगी की भीख मांग रहे थे। गले में फंसे जलते टायर के बीच चीखते चिल्लाते हुए दिखे, तीन दिन मोहल्लें में मौत तांडव कर रही थी, जब मदद करने आर्मी पहुंची, तब तक सब खत्म हो चुका था बस बची थी तो केवल जली हुयी लाशें। जब बात आई महिलाओं की तो होने लगी छंटनी पहले खुले में सभी जनानियों को बैठाते और चुनिन्दा महिलाओं को उठा ले जाते, ये भी नही पता कि कितनी गैंगरेप से मरी और कितनी शर्मिंदगी से...
गाँधी परिवार के वर्चस्व को बचाने के लिए डमी के रूप में मल्लिकार्जुन खड्गे को जिताया गया – भारद्वाज
दिल्ली का तिलक विहार, आबादी वाली इस बस्ती की अगर लोकेशन डालो, तो लिखा आता हैं विडो कॉलोनी लगभग 2 हजार फ्लैट्स वाले इस इलाके की यही तो खास पहचान है। कि यहां विधवाएं रहती हैं या फिर विधवाओं के बच्चे। 3 नवंबर तक इस समुदाय के हजारों लोगों की हत्या हुई, सैकड़ों बलात्कार हुए और जाने कितने लोग बेघर हो गए, आखों के सामने जलते हुए परिवार को देखकर उन्हें ना कोई इन्साफ मिला ना उस दर्द के लिए मरहम सिर्फ मिली भी तो चपरासी की नौकरी| एक बच्चा प्यास से तड़प रहा था उस रोज पानी जुटा पाना नामुमकिन था तो आखिरकार उस बेबश माँ ने अपना ही टॉयलेट बच्चे को पिला दिया ताकि उसकी जान बच जाएँ
वह यहीं मौसम था अक्टूबर जब कौर के पुरे परिवार ने एक साथ खाना खाया| कॉलोनी से बाहर आकर कैब बुक करने पर लोकेशन दिखती है- विडो कॉलोनी! ये नाम अपने-आप में वो जख्म है, जो शायद कभी न भर सके। दंगों के 21 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में इसके लिए माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक गया है।
