सीएम अशोक गहलोत का राजनीति का जादूगर कहते है और उनकी जादुगरी इन दिनों देखने को मिल रही है। गहलोत एक तरफ तो गांधी परिवार के प्रति वफादारी दिखा रहे है तो दूसरी तरफ सीएम पद पर बने रहने के लिए गांधी परिवार के सामने सर्त रखी है। कांग्रेस के लिए परेशानी कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है क्योंकि अध्यक्ष पद पर गहलोत के आने के बाद भी पायलट का सीएम बनने का सपना टूटता हुआ नजर आ रहा है।
क्योंकि सीएम गहलोत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वह राजस्थान छोड़कर नहीं जाएंगे और पार्टी का आदेश भी मानेंगे। कांग्रेस में एक पद का नियम है जो गहलोत पर भी लागु होता है लेकिन गहलोत ने कहा ऐसा जरूरी नहीं है। इसका मतलब पायलट को अभी सीएम बनने के लिए इंतजार करना होगा क्योंकि गहलोत ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है।गहलोत ने संकेत दे दिया है कि वह कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन करेंगे लेकिन वे राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी त्यागने के तैयार नहीं है।
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दिवाली से पहले कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चुनाव होना है और इसी के साथ नया सीएम भी मिलने का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने से पहले गहलोत और सोनिया गांधी की दिल्ली में बुधवार को करीब दो घंटे मीटिंग चली और इसके बाद वह कोच्चि जाएंगे, वहां वह राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे और उनको मनाने का प्रयास करेंगे।
कांग्रेस नेता भी दो गुटों में बटे हुए दिखाई दे रहे है उनका मानना है कि एक समय में एक पद होना चाहिए। अगर गहलोत अध्यक्ष बनते है तो उनको सीएम पद छोड़ना होगा तो दूसरा गुट इसके समर्थन में नहीं है। अगर गहलोत दोनों पद के साथ संभालते है तो यह पायलट के लिए बड़ा झटका होगा क्योंकि पायलट लंबे समय से गहलोत को दिल्ली भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
सचिन पायलट के समर्थकों को पूरी उम्मीद है कि इस बार वह मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे, लेकिन अशोक गहलोत ऐसा नहीं होने देंगे। गहलोत की जादूगरी के सामने पायलट गुट कई बार फेल हो चुका है और इस बार भी उसके फेल होने के आसान बन रहे है। गहलोत समझते हैं कि मौजूदा वक्त में केंद्र की राजनीति करना आसान काम नहीं है और ऐसे में वह सीएम बने रहने पर अड़े है।
सीएम की कुर्सी छोड़ते ही उनके हाथ से राजस्थान की कमान निकल जाएगी और पायलट गुट का दबदबा हो जाएगा। कांग्रेस का नया अध्यक्ष गहलोत का बनना तय है कि लेकिन इसके बाद भी राजस्थान की राजनीति में भूचाल आना भी निश्चत है।
