आधुनिक युग के संत रहे हमारे पूज्य संत बाबा नीम करौली...ऐसे ही बाबा नीम करौली को भगवान से कम नहीं माना जाता..जिनकी शक्ति के आगे पूरी दुनिया नग्मस्तकहोने पर एक तरीके से मजबूर हैं...इस वैज्ञानिक युग में भी ऐसा चमत्कार कर दिखाया जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती इन्हीं में से एक बाबा नीम करौली से जुड़ा किस्सा भी शामिल है..पूरे विश्व में मशहूर जाने माने साधु बाबा अपने फटे-पुराने कपड़ो में बिना टिकट के ट्रेन का सफर कर रहे थे...टिकट नहीं होने पर बाबा को अधिकारियों ने ट्रेन से उतार दिया..जिसके बाद ट्रेन मौके से हिली तक नहीं..अधिकारियों को जब बात समझ में आई तो उन्होंने बाबा से ट्रेन में सवार होने की मनुहार की.. आपको बता दें, जब बाबा ट्रेन में सवार हुए और आशीर्वाद दिया, तब जाकर कहीं ट्रेन रवाना हो सकी थी..
बाबा नीम करौली का नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था, लेकिन एक चमत्कार के बाद उन्हें बाबा नीम करौली के नाम से लोग जानने लगे..बाबाका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में वर्ष 1900 में हुआ..11 साल की उम्र में माता-पिता ने उनकी शादी कर दी..समय बीतने के साथ लक्ष्मण नारायण शर्मा का मन वैराग्य में लग गया..और उन्होंने साधु बनने के लिए साल 1958 में घर छोड़ दिया..आपको बता दें,अधिकारियों ने जब बाबा को खूब मनाया, तो वे भी मान गए और हंसते-हंसते ट्रेन में बैठने लगे..फिर बाबा जैसे ही बोगी में चढ़े तो ट्रेन स्टार्ट हो गई, लेकिन पायलट तब तक ट्रेन को आगे नहीं बढ़ा सका, जब तक कि बाबा ने उन्हें आगे बढ़ने का आशीर्वाद नहीं दिया..इसके बाद बाबा की शर्त के अनुसार रेलवे ने फर्रुखाबाद के नीम करौली गांव में एक रेलवे स्टेशन बनवाया..बाबा कुछ समय तक नीम करौली गांव में रहे और यहीं से उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जाना जाने लगा...
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लेखक राम दास की किताब 'Miracle Of Love' में भी उनके बारे में जिक्र किया गया है..नीम करौली बाबा अपने अनुयायियों के बीच महाराज जी के रूप में संबोधित किए जाते हैं..भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं..उन्हें साल 1960 और 70 के दशक में भारत की यात्रा करने वाले कई अमेरिकी नागरिकों ने अपना आध्यात्मिक गुरु माना...इसके बाद बाबा विश्व विख्यात हो गए.. और उनके शिष्यों में ‘राम दास’, ‘भगवान दास’, संगीतकार कृष्ण दास और ‘जय उत्तल’ शामिल हैं..
फ़िलहाल बाबा नीम करौली के आश्रम नैनीताल के कैंचीधाम, वृंदावन, ऋषिकेश, शिमला, फर्रुखाबाद में खिमासेपुर के पास नीम करौली गांव में है..इतना ही नही बल्कि भूमिआधार, हनुमानगढ़ी और दिल्ली-मुंबई में भी उनके आश्रम हैं...11 सितम्बर 1973 का वो दिन था तब बाबा नीम करौली ने अपनी देह त्याग दी और उनकी समाधी वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित नीम करौली आश्रम में हैं...
