रातों रात अमीर बनने का सपना किसी को भी गलत रस्ते पर दखेल देता है और पैसों की लालच में इंसान यह भूल जाता है कि उसका परिणाम अच्छा नहीं रहता है। लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक फैक्ट्री में जाली नोटों की ढे़र देखकर पुलिस की आंखे फटी की फटी रह गई। यह मामला बीकानेर का बताया जा रहा है जहंा एक गैंग ने 50 पैसे वाले पेपर पर 500 और 2000 के जाली नोट छाप दिए।
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इन नोटों को देखकर असली और नकली की पहचान नहीं की जा सकती क्योंकि पहली नजर में यह नोट असली ही नजर आते हैं। पुलिस ने इस मामले को लेकर आइबीआई को बीकानेर आने के लिए कहा क्योंकि जिस साॅफ्टवेयर से इनको बनाया है वो इन तक कैसे आया। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने ऑनलाइन टे्रनिंग लेकर नोट बनाए है।नकली नोट छापने के गिरोह को मास्टर मांइड सुरपुरा निवासी चंपालाल उर्फ नवीन है जो सॉफ्टवेयर के माध्यम से नकली नोट छापने का काम करता था।
सॉफ्टवेयर कहां से खरीदा गया इसको लेकर पुलिस जांच कर रही है। नकली नोट बनाने वाली गैंग को नगद रुपए लेने पर विश्वास नहीं था। चेक लेकर ही नोट दिए जाते थे। पुलिस ने आरोपियों के सभी बैंक खाते सीज कर दिए हैं।
जब नए नोट बनाए गए थे तो आरबीआई ने दावा किया था कि इनको आसानी से नहीं बनाया जाता है। लेकिन इस गैंग ने आसानी से नोटों को बना लिया और बाजार में उतार दिया। नकली नोट छापने के मामले में धारा 489 सी लगाती है और आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।
