Monday, 5 October 2026
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जाने देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की पूर्ण विधि और मुहूर्त

धर्म
जाने देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की पूर्ण विधि और मुहूर्त


  

हिंदू धर्म में देव-उठनी एकादशी व्रत का महत्व सबसे अधिक माना जाता हैं। मान्यता हैं कि इस दिन भगवान विष्णु 4 महीनों की लंबी नींद के बाद जागते हैं और पुनः अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। इस व्रत को करने से कई जन्मों के पाप का नाश होता हैं, बड़ी से बड़ी सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं और 100 अश्वमेध यज्ञ तथा कई राजसूर्य यज्ञ करने के बराबर माना गया हैं। इस रात जगराता करने से कई पीढ़ियों को मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। जिसके बाद शादी-विवाह भी प्रारभं हो जाते हैं। इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता हैं आइए जानते हैं कथा और पूर्ण विधि...

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तुलसी विवाह कथा:-

तुलसी, राक्षस जालंधर की पत्नी थी, वह पति-व्रता पत्नी थी, लेकिन पति के पापों के कारण दुखी थी इसलिए उसने अपना मन विष्णु भक्ति में लगा दिया था।  जालंधर का प्रकोप बहुत बढ़ गया था, जिस कारण भगवान विष्णु ने उसका वध किया। अपने पति की मृत्यु के बाद तुलसी ने सतीधर्म को अपनाकर सती हो गई। कहते हैं उन्ही की भस्म से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ और उनके विचारों और गुणों के कारण ही तुलसी का पौधा इतना गुणकारी बना। तुलसी के सदगुणों के कारण भगवान विष्णु ने उनके अगले जन्म में उनसे विवाह किया। इसी कारण से हर साल तुलसी विवाह मनाया जाता है।

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तुलसी विवाह विधि:-

  • तुलसी पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं।
  • फिर चूड़ी,बिंदी आदि जैसे 16 श्रृंगार से  तुलसी का श्रृंगार करें।
  • चौकी समेत शालीग्राम को हाथों में लेकर  तुलसी की सात परिक्रमा करें।
  • पूजन पूर्ण होने के बाद देवी तुलसी व शालिग्राम जी की आरती करें और उनसे सुख सौभाग्य की कामना करें।
  • पूजा संपन्न होने के बाद सभी में प्रसाद वितरित करें।


देव-उठनी एकादशी तिथि मुहूर्त:-

03 नवंबर शाम 07:30 शुरू होकर 04 नवंबर शाम 06:08 पर समाप्त होगी।



देव-उठनी एकादशी पूजा विधि:-

  1. मान्यता हैं की इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत किया जाता हैं।
  2. इस दिन प्रातः जल्दी उठ कर स्नान करे और साफ कपड़े ही पहने।
  3. घर की सफाई कर घर के आंगन में भगवान विष्णु के चरण की आकृति बनाए।
  4. एक ओखली में गेरू से भगवान हरी का चित्र बनाए और ओखली के पास मिठाई, फल, सिंघाड़े और गन्ना रखकर उसको डलिया से ढकने का महत्व होता हैं।
  5. शाम को पूजा के समय अपने पूजा स्थल और घर के बाहर और हर कोने पे दीपक जलाए।
  6. घर के सभी सदस्य भगवान विष्णु और सभी देवी-देवताओं का पूजन करे।
  7. आखिर में, शंख और घंटी बजा कर भगवान विष्णु को जगाया जाता हैं और कहा जाता है-“ उठो देवा, बैठो देवा, उँगलियाँ चटकाओ देवा- नई सूत, नई कपास, देव उठाए कार्तिक मास”।