कहते हैं जिन्दगी में कुछ हासिल करना हैं तो खतरों का सामना तोह करना पड़ता हैं |ऐसी ही एक कहानी हैंएक फेमस लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर की 'गलियां', 'कौन तूझे', 'कैसे हुआ', 'जियो रे' जैसे गानों को ज्यादातर लोग अपनी प्लेलिस्ट में रखते हैं मनोज का जन्म शुक्ल परिवार में हुआ था| आखों में गाने लिखने के सपने को सजाकर वह साल 1999 में मुंबई आ गये मुंबई आने से पहले उनको मालूम था कि उन्हें सफल होने के लिए जी तोड़ मेहनत करनी होंगी लेकिन वह अपने सपने के लिए संघर्ष करने को भी तैयार थे मनोज अपने सपने के प्रति मजीद संजीदा थे, लेकिन उन्हें और कोई काम मंज़ूर नहीं था परिस्थितियों के चलते उन्हें फुटपाथ पर सोना पडा|
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फुटपाथ पर रहने के दौरान उन्हें अनूप जलोटा से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ , जैसे ही अनूप जलोटा को पता चला कि मनोज अमेठी से आए हैं तो उन्होंने मिलने के लिए हां कर दिया। जलोटा ने मनोज को भजन लिखने को कहा , वो आराम से भजन लिखने लगे ताकि जब तक वो भजन पूरा हेगा तब तक चाय आ जाए | चाय आते ही मनोज ने वो भजन अनूप जलोटा को हाथ में थमा दिया अनूप ने 3000 का चेक मनोज के हाथ में रख दिया , पर अनूप ने उस भजन को कभी रिकॉर्ड नही किया था |
संघर्ष के दिन चलते रहें , सन 2002 मे मनोज स्टार प्लस का शो यात्रा लिखने लगे | इसी दौरान उनकी मुलाकात अभिताभ बच्चन से हुई , मनोज के शायरी अंदाज को देखकर उन्हें ‘कौन बनेगा करोडपति ‘ में काम करने का अवसर मिला |धीरे – धीरे उन्होंने गाने लिखने शुरू किये और एक विलन फिल्म का गाना ‘तेरी गलियां ‘ से फेमस हुए |उनके पुरस्कारों में यश भारती पुरस्कार,आईफा पुरस्कार और रेडियो मिर्ची संगीत पुरस्कार शामिल हैं।
