एक साल से ज्यादा समय तक चले किसान आंदोलन अब खत्म हो गया है और इस आंदोलन में किसानों की जीत हुई है। इस जीत के बाद किसानों ने केंद्र सरकार पर विश्वास करते हुए एक साल बाद अपने घर लौटने का फैसला किया तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों ने अब अपना सामान समेट कर घर जाने तैयारी भी शुरू कर दी है। घर लौटने से पहले सभी किसानों ने देशभक्ति गानों की धुनों पर गाजीपुर बॉर्डर पर जश्न मनाया।
घर लौटने से पहले कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का जश्न किसानों ने जमकर मनाया आौर इस दौरान वे एक साल की यादों को लेकर भावुक भी हुए। किसानों ने कहा कि वह किसी प्रकार का जुलूस नहीं निकालेंगे और बहुत ही साधारण तरीके से अपने ट्रैक्टरों पर सामान भरकर अपने घर जाएंगे।
राकेश टिकैत सबसे अंत में गाजीपुर बॉर्डर खाली करेंगे, उन्होंने कहा कि वे दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर सबसे पहले किसान आंदोलन करने के लिए मोर्चा लेकर पहुंचे थे। लंबे समय से सड़कों पर डटे किसानों के परिजन उनके लौटने का एक साल से इंतजार कर रहे थे। शनिवार तक
सिंघु बॉर्डर पूरी तरह से खाली हो जाएगा। सिंघु बॉर्डर छोड़ने के साथ कई किसान भावुक भी नजर आए।
पहले विवादित कानूनों की वापसी के बाद भी किसान पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे लेकिन सरकार ने सकारात्मक रूख देखकर किसानों ने घर जाने का फैसला किया। सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य व किसानों के खिलाफ मुकदमे हटाने पर सहमती के बाद किसान सहमत हुए।
