देश की आजादी के लिए कई लोगों ने अपनी जान की बाजी लगा दी लेकिन आजादी के बाद केवल कुछ लोगों को ही आजादी का श्रेय दिया जा रहा है। हाल ही में इंडिया गेट से अमर जवान शहीद स्माकर की ज्योति को हटाकर वहां पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाने का फैसला किया गया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर शहीदों का अपमान करने का अरोप लगाते हुए इस गलत बताया है।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जंयति पर बीजेपी ने पूरे देश में कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया तो इस बात से कांग्रेस आग बबूला हो गयी है। बीजेपी ने हमेशा से इस बात का विरोध किया है कि देश की आजादी में किसी एक विशेष परिवार का ही योगदान नहीं रहा है और अन्य देशभक्तों की अनदेखी की गयी है।
खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि नेताजी को लेकर उनके परिवार ने बड़े खुलासे करते हुए कहा कि महात्मा गांधी कभी नहीं चाहते थे कि उनके पिता राजनीति करें और इसी वजह से उनको दूर करने का प्रयास किया गया। नेताजी की बेटी ने कहा कि अगर उनके पिता आजादी के समय जिंदा रहते तो देश का विभाजन नहीं होने देते।
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भारत सरकार ने इंडिया गेट पर नेता जी की प्रतिमा लगाने का जो फैसला किया है वह बहुत ही अच्छा है। कई लोग इस बात को ज्यादा महत्व देते है कि देश की आजादी अहिंसा के कारण मिली है तो यह गलत है आजादी दिलाने में कई लोगों का हाथ है और उसमे आजाद हिंद फौज की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
नेताजी जब कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो गांधीजी काफी नाराज भी हुए थे और इसकी वजह थी कि वो नेता जी को राजनीति से दूर करना चाहते थे। नेताजी विभाजन के खिलाफ थे अगर वे जिंदा होते तो गांधीजी से मतभेद के बाद भी वे देश का विभाजन किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करते। मेरे पिता की मौत से जुड़े दस्तावेजों को दबाकर रखा गया इसका कारण किसी को नहीं पता। मोदी सरकार ने कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का काम किया है।
