कांग्रेस अध्यक्ष और राजस्थान में मुख्यमंत्री का चयन दिल्ली आलाकमान के लिए एक चुनौती बन गया है। गांधी परिवार के वफादार अशोक गहलोत ने पहले अध्यक्ष बनने की बात स्वीकार की लेकिन अपने उत्तराधिकारी की मांग को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले। जब दिल्ली आलाकमान का फैसला लेकर दिल्ली से माकन आए तो विधायकों ने बगावती तेवर दिखाकर दिल्ली आलाकमान को चुनौती दे डाली।
गहलोत गुट ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया और उन पर दबाव बनाने के लिए इस्तीफे की शर्त रख दी। इन विधायकों ने एक नहीं 3 शर्ते रखी जिसमें पायलट को सीएम नहीं और गहलोत की मर्जी से सीएम बनाए। माकन ने कहा यह अनुशासन हीनता है और इस पर कार्यवाही होगी। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है इस बगावत को लेकर कमलनाथ को दिल्ली बुलाया गया है और साथ में गहलोत गुट के 3 विधायकों पर कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है।
Delhi आलाकमान की पहुच से बाहर Rajasthan,Gehlot के आगे सब पस्त
इस घटना को शांत करने के लिए कमलनाथ को दिल्ली बुलाया गया है। जो अशोक गहलोत और पायलट गुट के बीच मध्यस्थता करने का काम करेंगे।ऑब्जर्वर अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा इसके बारे में कांग्रेस अध्यक्ष को अवगत कराया जाएगा। पायलट ने इस घटनाक्रम पर किसी प्रकार का बयान नहीं दिया है।
जोशी, शांति धारीवाल औ प्रताप सिंह पर गाज गिर सकती है।गहलोत समर्थकों ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करके दिल्ली आलाकमान को झटका दिया है। इस घटनाक्रम के बाद गहलोत का अध्यक्ष बनना आसान काम नहीं होगा।
