राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर गहलोत-पायलट के बीच तनातनी बढ़ने की खबर आनी शुरू हो गई है। कई लोगों ने तो यह तक कह दिया है कि दिल्ली के नेताओं ने पायलट को बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला कर लिया है और जल्द ही इसका एलान कर दिया जाएगा। पायलट कांग्रेस के सबसे बड़े यूवा नेता है और अगर कांग्रेस आलाकमान उनको उचित सम्मान के साथ बड़ा पद नहीं देगी तो इसका परिणाम पूरी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। पायलट समर्थक इस बार पूरे जोश के साथ उनको सीएम बनाने के पक्ष में नारे लगा रहे है तो कई बड़े नेता सीएम गहलोत को कुर्सी छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।
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सीएम गहलोत पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पर हमला करने से नहीं चुक रहे है तो पायलट भी सीएम को उसी भाषा में जवाब दे रहे है। पिछले एक महीने में दोनों नेताओं के बयानों से साफ नजर आ रहा है कि दोनों के तेवर ठंडे नहीं हुए है और एक दूसरे पर जमकर हमला बोल रहे है। गहलोत और पायलट सोनिया गांधी से मिल चुके हैं लेकिन हाईकमान से मुलाकातों के बाद भी दोनों के बीच की तल्खी कम नहीं हो पा रही है। दोनों नेताओं के समर्थक सोशल मीडिया पर जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।
पिछले दिनों पीके ने कांग्रेस के नेताओं से बैठकी की तो लगा वह जल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लेकिन पीके ने राजस्थान को लेकर नेताओं को साफ कह दिया है कि पायलट को कमान देनी होगी नहीं तो आने वाले चुनावों में परिणाम उनके पक्ष में नहीं आएगा। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि राजस्थान में जल्द ही सीएम बदल सकता है। गहलोत इस प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की बात करते है लेकिन खुद के इस्तीफे को सोनिया गांधी के पास रखे होने का दावा करते हैं।
राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है और इसी वजह से कांग्रेस सीएम बदलने की तैयारी में है। पायलट ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कहा था कि हमें सरकार बदलने की परम्परा को तोड़ना होगा। इसके लिए राजस्थान में बहुत मेहनत करनी की जरूरत है।
