राजस्थान में इन दिनों जल प्रलय का ऐसा आंतक मचा हुआ है कि कई जिलों में बाढ़ के हालता बने हुए है। वहीं इसका सबसे ज्यादा असर कोटा संभाग में देखने को मिल रहा है और चंबल नदी का ऐस विकराल रूप लगभग 35 साल बाद देखने को मिला है। 1986 वाली त्रासदी यादें फिर से जिंदा हो गई है और अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा हैं
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चंबल नदी उफान पर है तो वह अपना किनारा छोड़कर शहर में घुस गई है। बेघर हुए लोगों का रेस्क्यू कर शेल्टर होम में शिफ्ट किया जा रहा है। कोटा संभाग के सैकड़ों गांवों से संपर्क टूट गया है। कालीसिंध और पार्वती नदियों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है।
इस बार बारिश का रिकॉर्ड इतना ज्यादा रहा है कि जिसके चलते प्रदेश के कई बड़े बांध लबालब भर चुके है। प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है और मौसम विभाग के अनुसार आज भी कई जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है।
सरकार ने सभी कलेक्टर्स से बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी मांगी हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव के कार्य में उतारी गईं। लगातार बारिश का दौर नहीं रुका है जिसके कारण हालात बिगड़ गए है।
अजमेर, जयपुर और टोंक की प्यास बुझाने वाला बीसलपुर बांध भर चुका है और दोपहर तक गेट खोले जा सकते है। 19 साल में बीसलपुर बांध 5वीं बार भरा है और इस बार छठी बार गेट खोलकर पानी निकाला जाएगा। गेट खोलने से पहले चेतावनी जारी कर दी गई है। गुरुवार सुबह तक जलस्तर 315.36 आरएल मीटर पर पहुंच गया है।
