Monday, 5 October 2026
अभी का दौर

रामेश्वर डूडी ने छोड़ा पायलट का साथ, कांग्रेस विधायक ने दी धरने की धमकी!

बीकानेर संभाग
रामेश्वर डूडी ने छोड़ा पायलट का साथ, कांग्रेस विधायक ने दी धरने की धमकी!

राजस्थान कांग्रेस के लिए इन दिनों अपने ही विधायक पार्टी के खिलाफ धरने प्रदर्शन की धमकी दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ और पायलट—गहलोत की जंग दिल्ली आलाकमान के लिए परेशानी बनी हुई है। इन दोनों नेताओं के समर्थक भी पाला बदल रहे है जो कभी पायलट के साथ नजर आते थे वो अब गहलोत गुट के साथ खड़े नजर आ रहा है। बात करें राजस्थान कृषि उद्योग विकास बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी पहले पायलट गुट के साथ नजर आते थे लेकिन अब उनकी पायलट से दूरियां बढ़ गई है। क्योंकि उन्होंने आज किसान सम्मेलन का आयोजन किया लेकिन इसमें पायलट को नहीं बुलाया और इसी वजह से सवाल खड़े हो रहे है कि दोनों में दूरियां बढ़ गई है। 

इस कार्यक्रम में सीएम अशोक गहलोत, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ सभी मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों को बुलाने की बात सामने आ रही है। लेकिन सचिन पायलट को नहीं बुलाया है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। पायलट ने अपना बगावती तेवर सख्त कर रखा है और उनके द्वारा जो मुद्दे उठाए गए है उन पर जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे है। उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करके दिल्ली आलकमान को संदेश दिया कि अगर राजस्थान में फिर से सरकार बनानी है तो उनको वह वादे पूरे करने होंगे जो सत्ता में आने से पहले किए थे। 

इसी वजह से पायलट के समर्थक नेता भी उनसे दूरी बना रहे है और डूडी ने भी इसी वजह से दूरी बनाई हो सकता है। गहलोत ने डूडी के बहाने पायलट को जवाब देने की रणनीति अपनाई हो ऐसा भी हो सकता है। पायलट ने इस कार्यक्रम को लेकर अभी तक किसी प्रकार का कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
रामेश्वर डूडी का किसान सम्मेलन गहलोत खेमे के नेताओं का जमावड़ा भी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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वहीं बात करें पायलट समर्थक विधायक राकेश पारिक की तो उन्होंने मसूदा को अजमेर जिले में ही रखने की मांग करते हुए अपनी ही सरकार को धरने की धमकी दी है। विधायक ने कहा कि उनकी विधानसभा सीट मसूदा को प्रशासनिक दृष्टि से अतिरिक्त जिला कलेक्टर अजमेर में नहीं रखा गया तो वह धरने पर बैठ जाएंगे।

केकड़ी में अतिरिक्त जिला कलेक्टर का नया कार्यालय बनाया है और इसमें मसूदा, बिजयनगर और भिनाय तहसील को शामिल किया गया है। लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि उनको अजमेर में ही रखा जाए और ऐसा नहीं होता है तो वह धरने पर बैठ जाएंगे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब से नए जिलों की घोषणा हुई है तब से कई विधायकों और मंत्रियों ने इसका विरोध किया है।