Monday, 5 October 2026
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इस राजकुमार को दिल दे बैठी थी लता मंगेशकर, लेकिन शादी से पहले टूटा रिश्ता

फिल्मी फीवर
इस राजकुमार को दिल दे बैठी थी लता मंगेशकर, लेकिन शादी से पहले टूटा रिश्ता

सुर साम्राज्ञी व भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन से समूचा देश शोक में डूबा हुआ है। लता दी के जीवन के कई ऐसे किस्से है जो लोगों के लिए एक मिशाल है तो कुछ ऐसे राज भी है जिनसे लोग अंजान है। राजस्थान से गहरा नाता रहा हैं शायद ये बात कम ही लोग जानते होंगे । बताया जाता हैं कि लता दी को डूंगरपुर के महाराजा को दिल दे बैठी थी लेकिन उनकी लेकिन वह उनसे शादी नहीं रचा पाई । राज सिंह डूंगरपुर रियासत के अंतिम राजा महारावल लक्ष्मण सिंह के तीसरे बेटे थे. मुंबई में स्कूलिंग के दौरान वह क्रिकेट खेलने लगे । 

प्रथम श्रेणी क्रिकेट के दौरान उनकी मुलाकात लता दी के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से हुई और वह उनके घर जाने लगे। तभी लता दीदी से उनकी मुलाकात हुई थी। जहां लता दीदी को क्रिकेट पसंद था तो वहीं राज सिंह जी को संगीत पसंद था और दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए ।
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उनकी दोस्ती प्यार में कब बदल गई, पता नहीं चला दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन राजघराने के दबाव के बाद ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि उनका प्यार परवान नहीं चढ़ पाया, लेकिन दोनों ने ताउम्र कुंवारा रहकर इसे अमर अवश्य कर दिया । राजपरिवार नहीं चाहता था कि राज सिंह किसी साधारण परिवार की सदस्या से शादी करें । बढ़ते दबाव के बाद राज सिंह परिवार की जिद के आगे झुक गए और उनकी शादी नहीं हो पई। बताया कि राज सिंह लता को प्यार से मिट्ठू बुलाते थे । 

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राज सिंह जी के कहने पर लता दीदी ने डूंगरपुर के सरकारी हास्पिटल में 25 लाख रुपये देकर एक हाल बनवाया था। तब वो राज्यसभ सदस्य थी। आदिवासी इलाके में मातृ-शिशु कल्याण के लिए यह राशि दी गई थी। शुरुआत में इसमें गायनी की ओपीडी चलती थी, लेकिन अब एआरटी सेंटर चल रहा है। उस हाल पर लगी अनावरण पट्टिका पर लता मंगेशकर का नाम लिखा है।


12 सितंबर, 2009 को राज सिंह का मुंबई में निधन हो गया था। इसके बाद उनका शव डूंगरपुर लाया गया। राजपरिवार के सुरपुर स्थित मोक्षधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। कहा जाता है कि राज सिंह के निधन पर लता मंगेशकर एक दिन गुपचुप तरीके से डूंगरपुर आई थीं । सुरपुर मोक्षधाम पर उनकी छतरी पर अंतिम दर्शनों के बाद वह मुंबई लौट गई थीं।