जयपुर नगर निगम ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर और आयुक्त यज्ञमित्र सिंह के बीच हुई मारपीट मामले में नीचली अदालत से मेयर को बड़ी राहत दी है। दोनों के बीच हुई विवाद के बाद उनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज करके कोर्ट में चालान पेश किया था लेकिन इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सौम्या को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। लकिन इस मामले में 4 पार्षदों के खिलाफ कोर्ट ने चार्ज लगाने और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करने का फैसला सुनाया है।
सौम्या गुर्जर के वकील नाहर सिंह ने बताया कि पिछले साल 6 जून को दोनों के मध्य विवाद हुआ था। इसके बाद आयुक्त ने चार पार्षद अजय सिंह, पारस जैन, शंकर शर्मा और रामकिशोर के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज करवाया था। आयुक्त की तरफ से दर्ज FIR में पार्षदों का नाम था लेकिन मेयर सौम्या का नाम नहीं था।
पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया तो इसमें सौम्या का नाम भी जोड़ दिया। एक साल बाद कोर्ट ने सौम्या को दोषमुक्त करार दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में सौम्या को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के उस आदेश पर स्टे दे दिया था, जिसमें सरकार ने सौम्या गुर्जर को पद से निलंबित किया था।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सौम्या ने मेयर की कुर्सी संभाल ली थी। लेकिन अभी भी दोनों के मध्य तनाव बना रहता है लेकिन आज के इस फैसल के बाद मेयर को बड़ी राहत मिली है। बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस का हाथ बताया था और आयुक्त के सहारे वह निगम के काम रोक रही है।
