5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान की 50वीं वर्षगांठ समारोह का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही वह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का अनावरण भी करेंगे। यह मूर्ति 216 फीट ऊंची स्टेच्यू ऑफ इक्वेलिटी प्रतिमा है जो 11वीं शताब्दी के भक्ति संत श्री रामानुजाचार्य की याद में बनाई गई है।
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इस प्रतिमा को बनाने में सोना, चांदी, तांबा, पीतल और जिंक धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। रामानुजाचार्य एक महान सुधारक थे जिन्होंने समाज में फैली कई कुरीतियों को खत्म करने का काम किया। वैष्णव संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुरू हुए इस समारोह के दौरान 14 दिन 1,035 कुंडों के साथ 14 एक महायज्ञ किया जाएगा।
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रामानुज ने भक्ति आंदोलन को बढ़ाया उन्होंने अपने उपदेशों से अन्य भक्ति विचारधाराओं को प्रेरित किया। उन्हें अन्नामाचार्य, भक्त रामदास, त्यागराज, कबीर और मीराबाई जैसे कवियों के प्रेरण श्रोत माने जाते हैं। इसको बनाने में करोड़ो रूपए खर्च हुए है और इसी वजह से यह मूर्ति चर्चा का विषय बनी हुई है।
श्री रामानुजाचार्य के जीवन को लेकर थ्रीडी प्रेजेंटेशन मैपिंग प्रदर्शित की जाएगी और इस दौरान पीएम मोदी 108 दिव्य देशमों के आइडेंटिकल रिक्रिएशन का भी दौरा करेंगे।
