हिन्दू धर्म के सभी वर्तों त्यौहार का अपना महत्व है लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किए जाने वाले निर्जला एकादशी व्रत का अपना अलग ही महत्व है, इस बार निर्जला एकादशी व्रत 10 जून को है, निर्जला एकादशी व्रत करने से साल की 24 एकादशीयो को करने जितना फल मिलता है, निर्जला एकादशी व्रत का क्या है पूजा विधान,पूजन सामग्री और व्रत करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान चलिये आपको बताते है...
निर्जला एकादशी व्रत को भीमसेन एकादशी व्रत भी कहा जाता है, क्योंकि इस व्रत को महाबली भीम ने भी किया था, ज्येष्ठ मास में गर्मी अधिक रहती है इसलिए जल की महता को देखते हुए जलदान करना विशेष पुण्य माना जाता है, कहते है जलदान से सभी मनोकामना पूरी होती है।
दंगाईयों के घरों पर अगर चला Bulldozer तो कफन बांधकर निकलेंगे पत्थरबाज!
कहा जाता है कि निर्जला एकादशी व्रत करने से स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है.
मृत्यु के बाद जीवात्मा को ले जाने के लिए पुष्पक विमान आता है.
निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी पाप मिट जाते है.
निर्जला एकादशी में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है.
पूजन सामग्री में इन चीजों का उपयोग करना चाहिए.
भगवान विष्णु का चित्र, कच्चा नारियल, फूल, फल, धूप, दीप, कपूर
पंचामृत, पान, सुपारी, लौंग, चंदन, घी, अक्षत और मिठाई
निर्जला एकादशी का व्रत करने से सुख समृद्धि की भी वृद्धि होती है.
व्रत करने वाले व्यक्ति को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले दशमी को भी मांसाहारी भोजन, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए.
व्रत करने वाले व्यक्ति के उस दिन पानी भी वर्जित होता है, सेहत को ध्यान में रखते हुए करें व्रत.
ये व्रत शारीरिक और मानसिक संयम का पालन करने वाला भी है.
इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें, मन में किसी के लिए भी बुरे विचार न लाएं.
अगर किसी घर में निर्जला एकादशी का व्रत नहीं भी किया जाता तो भी उस दिन चावल, बैंगन, शलजम ना खाएं.निर्जला एकादशी का व्रत तभी पूरा होता है जब उस दिन दान-पुण्य किया जाए, सामर्थ्य अनुसार दान जरूर करें.
