पीएम मोदी ने ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए देश में 10 जनवरी से कोरोना वैक्सीन की 'बूस्टर डोज' लगाने का फैसला किया है। इस बूस्टर डोज को भारत में 'प्रिकॉशन डोज' के नाम से जाना जाएगा। इस वैक्सीन की शुरूआत पहले की तरह फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थकेयर वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को देने का फैसला किया है। इस डोज को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि उनको तीसरी डोज कब लगेगी और इसका कितना फायदा होगा।
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दुनिया के सभी देशों ने कोरोना की दो डोज के बाद तीसरी बूस्टर डोज ली है लेकिन भारत में इसे 'प्रिकॉशन डोज' के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। जो लोग कोरोना की दो डोज ले चुके है उनको तीसरी डोज लेनी होगी क्योंकि इसके लेने से ओमिक्रॉन जैसे वायरस का खतरा कम होगा।
सरकार ने अभी प्रिकॉशन डोज को लेकर कोई गाइडलाइंस जारी नहीं की है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि दूसरी और तीसरी डोज के मध्य 10 से 12 महीने का अंतर होना चाहिए। 10 जनवरी से तीसरी डोज उन्हीं लोगों को लगाई जाएगी जिन्होंने 2021 के फरवरी से मार्च के बीच दूसरी डोज ली थी।
कोरोना के खिलाफ वैक्सीन से बनी इम्युनिटी कुछ महीनों बाद कम होने लग जाती है और ऐसे में वैक्सीन की बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ती है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बाद इसकी बहुत ज्यादा आवश्यकता पड़ने वाली है और इसी वजह से इस डोज को लेकर बड़ा फैसला किया है। 3 जनवरी से 15 से 18 के बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगना शुरू हो जाएगा।
