Monday, 5 October 2026
अभी का दौर

रूस-यूक्रेन की जंग से जाएगी 20 लाख भारतीय लोगों की नौकरी 

रेसिपी
रूस-यूक्रेन की जंग से जाएगी 20 लाख भारतीय लोगों की नौकरी 

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार महीने से जारी युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यूक्रेन में कब्जे को लेकर रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है। युद्ध तो रूस और यूक्रेन के बीच हो रहा है लेकिन इसकी वजह से दुनिया में बहुत कुछ बदल गया है, गेहूं से लेकर कच्चा तेल सबकी कीमते बढ़ गई है वहीं भारत में भी अब इस युद्ध असर दिखने लगा है करीब 20 लाख लोगों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, तो आखिर भारत के लोगों पर रूस और यूक्रेन युद्ध का क्या असर पड़ा और क्यों खड़ा हुआ ये संकट देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।

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अग्रेजों के भारत पर शासन से पहले भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, लेकिन भी भारत का एक ऐसा शहर जो डायमंड सिटी के नाम से मशहूर है हम बात कर रहे है गुजरात के सूरत शहर की, इस डायमंड सिटी की चमक भी अब फीकी पड़ती दिखाई दे रही है, रूस और यूक्रेन के बीच चार महीने से जारी युद्ध की वजह से यहां हीरा पॉलिश करने वाले 20 लाख लोगों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सूरत को पुर्तगालियों के समय में बड़ी पहचान मिली थी, तापी नदी के मुहाने पर बसे इस शहर को मूल रूप से एक बंदरगाह वाले नगर के तौर पर बसाय गया, लेकिन आजादी के बाद 60 और 70 के दशक में इसने Diamond City का रुतबा हासिल कर लिया. वैसे सूरत कपड़े के थोक व्यापार का भी एक बड़ा सेंटर है. दुनिया के 90% हीरों को सूरत में ही तराशा और पॉलिश किया जाता है।


सूरत के इस संकट की वजह रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध है. इन प्रतिबंधों की वजह से भारत के लिए रूस से हीरे और अन्य रत्नों का आयात करना मुश्किल हो गया है, जबकि इस मामले में रूस भारत के लिए सबसे बड़ा सप्लायर है, सूरत के व्यापारी रूस से लगभग 27 प्रतिशत कच्चे हीरे का आयात कर रहे थे, लेकिन युद्ध के कारण अब इतनी मात्रा गुजरात की हीरा यूनिट्स तक नहीं पहुंच पा रही है. इसकी वजह से काम प्रभावित हो रहा है. युद्ध से पहले गुजरात पॉलिश करने के लिए कुल कच्चे हीरे में से लगभग 30 प्रतिशत रूसी हीरा खनन कंपनी अलरोसा से आयात करता था. गुजरात में कट और पॉलिश किए गए हीरे में से 60 प्रतिशत रूसी मूल के होते हैं, जिनमें से ज्यादातर छोटे आकार के हीरे होते हैं. इन प्रतिबंधों की वजह से सूरत की स्थानीय ट्रेड यूनियन का अनुमान है कि अब तक सूरत में 30,000 से 50,000 हीरा कारीगरों की जॉब चली गई है. जबकि इस काम पर निर्भर लोगों की संख्या 15 से 20 लाख तक है।