राजस्थान में 26 अगस्त को होने जा रहे छात्रसंघ चुनावों को लेकर राजस्थान विश्विघालय और जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए है। बताया जाता है कि इन चुनावों में जीतने वाले छात्र नेता भविष्य में विधायक और सांसद जरूर बनते है और इसके कई उदाहरण देखने को मिल जाते है। आरयू में निर्दलीय उम्मीदवार निहारिका जोरवाल ने आदिवास और दलित कार्ड के सहारे चुनावी माहौल को एकतरफा कर दिया है और कई पूर्व छात्र नेताओं के सहारे अपनी जीत पक्की करने की तरफ बढ़ रही है।
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वहीं दूसरी और NSUI और ABVP को समझ नहीं आ रहा है कि वह निहारिका का तोड़ कैसे निकाले और एबीवीपी के दो उम्मीदवारों का नांमाकन कैंसिल हो गया है तो एनएसआईयू की बागी निहारिका बड़ी परेशानी बन गई है। इन समीकरणों की बात करें तो इस बार भी आरयू की अध्यक्ष निर्दलीय के खाते में जाती दिख रही है अगर चुनावों से पहले कोई बड़ा उल्टफेर होता है तो समीकरण बदल सकते हैं नहीं तो निहारिका की जीत तय है।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। लेकिन निर्दलीय मोती सिंह जोधा के नाम वापस लेने के बाद अब SFI के प्रत्याशी अरविंद सिंह भाटी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
अरविंद सिंह को एबीवीपी के राजवीर सिंह बांता व एनएसयूआई के हरेंद्र चौधरी से कड़ी टक्कर मिल सकती है। लेकिन अरविंद सिंह को पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह भाटी का समर्थन जिन्होंने पिछले चुनावों में निर्दलीय जीत हासिल करी थी। मोती सिंह जोधा के नामांकन दाखिल करने से मुकाबला रोचक हो गया था लेकिन राजपूत समाज के लोगों ने भी मोतीसिंह से बात की और नाम वापस लेने का फैसला किया तो अरविंद सिंह की जीत के आसार बढ़ गए। 26 अगस्त को मतदान होगा और 27 को नतीजे आएंगे और उस दिन साफ हो जाएगा की छात्रों ने किसे अपना नेता चुना है। अगर दोनों विश्विघालयों में NSUI और ABVP को हार मिलती है तो यह सोचने वाली बात होगी।
