Monday, 5 October 2026
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यूपी चुनाव: इस शख्स के नाम से कांपती थी यूपी की जनता, फिर हुआ ये हाल

चुनाव 2023
यूपी चुनाव: इस शख्स के नाम से कांपती थी यूपी की जनता, फिर हुआ ये हाल

यूपी की सियासत आज भी उन लोगों का सिक्का चलता है जो कई मामलों में अपराधी है और चुनाव लड़कर अपने आप को जनता का सेवक बताते है। आज हम आपको यूपी के सबसे बड़े माफिया की कहानी बता रहे हैं जो जुर्म की दुनिया का सबसे बड़ा बादशाह माना जाता था। लेकिन योगी सरकार में उसका खौफ खत्म हो गया है और उसे जेल की सलाखों में डाल दिया गया।

पूर्व विधायक और पूर्व सांसद अतीक अहमद का नाम आते ही लोगों की याद ताजा हो जाती है कि उसके खौफ के आगे सरकार भी कुछ नहीं कर पाती थी। इसका 1962 में हुआ परिवार की आर्थिक हालत खराब थी और इसके कारण पढ़ाई नहीं करके अपराध की दुनिया में जाने का फैसला किया। इसके बाद उसने बहुत कम समय में जुर्म की दुनिया से सियासत तक पहुंच गया। उसने फिल्मी स्टाइल में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही का काम शुरू किया।

महज 17 साल की उम्र में उसका नाम एक मर्डर केस से जुडा और इसके बाद उसके अपराधों की हिस्‍ट्री शीट खोल दी गयी। इसके बाद उसने राजनीति में जाने का फैसला किया रुख कर लिया और 1989 में पहली बार इलाहाबाद विधानसभा सीट से अतीक ने चुनाव लड़कर विधासभा पहुंचा। इसके बाद निर्दलीय चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचा इसके बाद 1996 में समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया और वह एक बार फिर से विधायक बना। 

अतीक ने समय के साथ दल बदलकर चुनावों में जीत हासिल करता रहा और 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक को फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और वह सांसद बन गया। लेकिन इसके बाद मायावती सरकार में उसको डर लगने लगा तो वह सांसद रहते हुए अंडरग्राउंड हो गया। 

2004 में अतीक ने अपने छोटे भाई अशरफ को मैदान में उतारा तो बसपा ने उसके सामने राजू पाल को चुनावी मैदान में उतार दिया। इसके बाद अशरफ की हार हुई तो विधायक बने राजू पाल को दिनदहाड़े गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। विधायक की हत्या से हड़कंप मच गया और इस हत्याकांड में सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को आरोपी बनाया गया था। इस कांड के बाद सपा ने अतीक को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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गिरफ्तारी के डर से वह फरार हो गया और दिल्ली में समर्पण कर दिया। बताया जाता है ​कि अगर वह ऐसा नहीं करता तो उसकी हत्या हो सकती थी। 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही वह सपा में आ गया और इस बात से अखिलेश भी नाराज थे।

2017 में योगी की सरकार बनते ही पुलिस ने कई अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन एनकाउंटर शुरू क​र दिया तो यूपी के बड़े बड़े अपराधियों को मौत का डर लगने लगा। इस दौरान अतीक ने मारपीट की तो वह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई और इसके बाद अतीक जेल में डाल दिया गया। बताया जाता है कि उसने अपनी जान बचाने के लिए ऐसा किया। अतीक के नाम से जेल अधिकारी भी घबराते थे। इसी वजह से अतीक को गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया और आज भी वह वहीं बंद है।