दुनियाभर में राजा रजवाड़ों के नाम से अपनी अलग पहचान बनाने वाला राजपूताना जो अब राजस्थान बन गया है लेकिन मेवाड़ रियासत का अपना अलग ही इतिहास रहा हे और वह ऐसी रियासत है जिसमें एक से बढ़कर एक वीर योद्वा हुए लेकिन इस वंश के सबसे पा्रकमी योद्वा प्रताप का नाम आते ही हर भारतीय में अलग ही जोश देखने को मिलता है क्योंकि उनका अपनी मातृभूमि के लिए लिया गया प्रण जो जंगलों में घास की रोटी खाने से लेकर भील समाज के साथ मिलकर मुगलों को देश से बाहर निकालने का संकल्प आज भी उनको अमर बनाए रखा है
महाराणा प्रताप, मेवाड़ के महाराजा, राजपूताना के योद्धा और मुग़ल साम्राज्य के ख़िलाफ़ लड़ने वाले वीर योद्धा थे। वह मेवाड़ राज्य के उत्कृष्ट स्थानीय स्वतंत्रता लड़ाकू राजा थे। महाराणा प्रताप का जन्म 1540 ई. में हुआ था और उनकी मृत्यु 1597 ई. में हुई.. महाराणा प्रताप का जन्म सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा उदय सिंह के पुत्र के रूप में हुआ..उनके शौर्य, धैर्य और दृढ़ संकल्प के कारण वे भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माने जाते हैं...इतना ही नही बल्कि आखिर तक मुग़ल सम्राट अकबर के साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष किया और अपने राज्य की स्वतंत्रता की रक्षा की...जीवनभर मेवाड़ की सुरक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया और भारतीय इतिहास में महानतम योद्धा माने जाते हैं। महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी का युद्धमें अकबर की सेना के खिलाफ अपनी सेना का प्रमुख होने का कार्यभार संभाला। यह युद्ध मेवाड़ की हार के साथ खत्म हुआ, लेकिन प्रताप की दृढ़ता और दृढ़ संकल्प ने उन्हें राजस्थानी लोकतांत्रिक आदर्श का प्रतीक बना दिया।
महाराणा प्रताप की जीवन की कहानी में उनकी संघर्षपूर्ण लड़ाई और वीरता का अत्यंत महत्व है। महाराणा प्रताप ने जोहरी चश्मा के माध्यम से भारतीय जनता को एकजुट करने का प्रयास किया और उन्होंने अपने जीवन को शौर्य, स्वाधीनता और धर्म के लिए समर्पित किया...महाराणा प्रताप का नाम भारतीय इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान रखता है और उन्हें राजपूत गर्व का प्रतीक माना जाता है। उनकी वीरता, साहस और स्वतंत्रता के आदर्शों ने उन्हें भारतीय जनसाधारण के दिलों में अद्वितीय स्थान प्राप्त कराया है..महाराणा प्रताप की जयंती भारत में प्रतिवर्ष मनाई जाती है और उन्हें गर्व से याद किया जाता है...
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उन्होंने अकबर के साम्राज्य के साथ विभिन्न युद्ध किए और विजयों और हारों के बावजूद अपनी असलाहत पर अड़ा रहे। 1576 ई. में हुई हाल्दीघाटी की लड़ाई में उनकी सेना ने मुग़ल सेना के ख़िलाफ़ बड़ी प्रतिरोधक लड़ाई लड़ी, हालांकि वे इस लड़ाई में हार गए थे। महाराणा प्रताप को भारतीय इतिहास में एक महान वीर और राष्ट्रीय नायक के रूप में माना जाता है। उनकी वीरता, साहस और दृढ़ संकल्प को सलाम किया जाता है, जिसने उन्हें लड़ाई और विपणन के दौरान अकबर के विशाल इम्पीरियल सेना के ख़िलाफ़ खड़े होने की साहसिकता दिखाई। उनकी जीवनी भारतीय वीरता और साहस की मिसाल के रूप में आज भी मान्यता प्राप्त है।
