समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन लगभग हो चुका है और जल्द ही दोनों पार्टियां इस नये गठबंधन का ऐलान करेंगी। यह नई जोड़ी यूपी में बहुत ज्यादा युवा वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
समाजवादी पार्टी ने इस बाद बड़े दलों के साथा गठबंधन करने की बजाय छोटे दलों से गठबंधन करने पर ज्यादा फायदेमंद समझ रही है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि रालोद के अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे है और उनका अध्यक्ष के तौर उनका पहला चुनाव होगा। सपा और रालोद के गठबंधन से पहले सीटों को लेकर सहमती बन चुकी है और 21 नवंबर इस गठबंधन का एलान किया जा सकता है। दोनों पार्टियों के अध्यक्ष युवा है और यूपी में इन दोनों चेहरों को काफी पसंद भी किया जाता है और चुनाव नतीजों के बाद पता चलेगा की इन दोनों का गठबंधन कितना कारगर साबित हुआ।
रालोदा के पास अच्छा खासा जाट वोट बैंक है तो सपा के पास यादव वोट बैंक अगर इन दोनों के एक होने से कई सीटों पर इनका सीधा प्रभाव पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार यूपी चुनावों में जातिय वोट बैंक किसी भी हालात में काम नहीं करेगा इस बार विकास, रोजगार, सुरक्षा और अपराध के नाम पर जनता वोट करेगी। पिछले चुनावों के मुकाबले इस चुनाव में सपा को ज्यादा फायदा होता दिख रहा है। इस चुनाव में चाचा—भतीजे की लड़ाई खत्म हो गयी है और जल्द ही दोनों एक मंच से वोट मांगते नजर आ सकते है। यूपी चुनावों को लेकर इस बार कांग्रेस ने प्रियंका पर दाव खेला है तो बीजेपी योगी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ सकती है।
