उम्र 72 साल.....गांधीवादी अंदाज और राजनीति के माहिर खिलाडी....शब्दावली में तारीफों के कसीदे कम पड सकते है लेकिन इस शख्स की राजनीतिक रणनीति के विरोधी भी कायल है...हम बात कर रहे है सूबे के मुखिया अशोक गहलोत की... .कभी जादूगर तो कभी मारवाड के गांधी बनकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले गहलोत, आज अपना 72 वां जन्मदिन मना रहे है.....हम उनके स्वस्थ जीवन की कामना करते है और इस मौके पर आपको दिखाते है गहलोत के जीवन की वो अनसुनी कहानियां जो शायद आपने नही सुनी होगी...

वीओ- सूर्यनगरी जोधपुर में स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर जन्मे अशोक गहलोत के पिता जादूगर थे. अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्नातक डिग्री पूरी करने के बाद अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. छात्र जीवन से ही गहलोत ने राजनीति जीवन में कदम रख लिया....करीब 5 दशक से गहलोत ने राजस्थान की राजनीति को करीब से देखा है.....पार्टी के अंदर और बाहर विरोध के बावजूद सफलतापूर्वक कार्यकाल और राजनीतिक संकट से उबरने की वजह से उन्हें राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है...कई बार ऐसा भी हुआ है की उन्होने अपनी राजनीति का लोहा मनवाया है और विरोधियों को पस्त किया है... मोहनलाल सुखाड़िया के बाद अशोक गहलोत के राजनीतिक कार्यकाल को प्रदेश की राजनीति के एक कालखंड के रूप में देखा जा सकता है....1998 के विधानसभा चुनाव में गहलोत के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी ने 156 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इससे पहले बतौर अध्यक्ष गहलोत ने संगठन की मजबूती पर काम किया और जिलेवार पार्टी के कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की...

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जिस दौर में कांग्रेस कमजोर हो रही थी, उस दौर में गहलोत ने अलग-अलग जातियों और वर्ग से नेताओं को चुना और पार्टी के लिए युवा नेताओं की लंबी फेहरिस्त तैयार की.....राजस्थान में गहलोत के लिए राजनीति कभी भी आसान नहीं रही. उन्हें हमेशा अपने विरोधियों से जूझना पड़ा. यहां तक की गहलोत को खुद को स्थापित करने के लिए वर्चस्व वाले नेताओं को साधना भी पड़ा.....कोरोना जैसी महामारी के बीच पार्टी के अंदर बगावत के बाद सरकार को गिरने से बचाना भी गहलोत की कामयाब राजनीतिक पारी और मिसाल के रूप में हमेशा देखी जाती रहेगी. शासन में भी अशोक गहलोत का जलवा हमेशा बरकरार रहा. कर्मचारियों के विरोध के बावजूद सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कोशिश, हमेशा उनकी सफलता के रूप में गिनी जाती है.....

ऐसे में जब अशोक गहलोत भाजपा को चुनौती देते हुए सरकार को रिपीट करने का दावा करते हैं तो ओपीएस, मुफ्त इलाज और बिजली में मिल रही छूट जैसे अवसर चुनाव के दौरान गहलोत के ट्रंप कार्ड के रूप में ही देखे जाएंगे.... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विपरीत राजनीतिक विचारधारा से आते हैं. इसके बावजूद कई मर्तबा सार्वजनिक मंच पर मोदी गहलोत की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए देखे गए....अशोक गहलोत को महज 34 वर्ष की उम्र में राजस्थान कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया था. .....गहलोत एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें बतौर केंद्रीय मंत्री 3 प्रधानमंत्री के साथ काम करने का मौका भी मिला, जिनमें इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव जैसे बड़े नाम शामिल है...

इसके बाद गहलोत ने जोधपुर के सरदारपुरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव जीतकर राजस्थान की विधानसभा में एंट्री ली और साल 2003, 2008, 2013 और 2018 के चुनाव में इसी सीट से जीत हासिल की और विधानसभा चुनाव में लगातार जीत का सिलसिला बरकरार रखा....

गहलोत के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपने विरोधियों को राजनीति से ठिकाने लगाने में महारथ हासिल है. वहीं गहलोत को कांग्रेस में अनुभवी और कुशल रणनीतिकारों की पहली पंक्ति के नेताओं में गिना जाता है... गहलोत कांग्रेस में राजस्थान से लेकर दिल्ली दरबार तक की राजनीति में बराबर साझेदारी रखते हैं. राजनीतिक जीवन में कांग्रेस में रहते हुए ऐसे कई मौके आए जब हाईकमान के कहने पर गहलोत ने दी हुई जिम्मेदारी को कुशलतापूर्वक निभाते हुए संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार का परिचय दिया.....