Monday, 5 October 2026
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भादों में मेघों का मल्हार, खरीफ फसलों को मिला जीवनदान

राज्य समाचार
भादों में मेघों का मल्हार, खरीफ फसलों को मिला जीवनदान

ब्यावर। जिले भर में भादों में मेघों ने गाया राग मल्हार जिससे खेतों को मिला जीवनदान। रुक-रुककर दिनभर बरसे बदरा, खरीफ फसलों को मिली राहत और आगामी फसल की उम्मीदों को भी मिली मजबूती। श्रावण मास में औसत बारिश के बाद भादों माह में एक बार फिर मानसून सक्रिय होने से किसानों के चेहरों पर उम्ममीद की चमक लौट आई है।

फसलों को मिली राहत

शुक्रवार रात से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी जारी रहा। शनिवार को दिनभर रुक-रुककर मध्यम बारिश होती रही। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बारिश से खेतों में खड़ी फसलों को काफी राहत मिली है। भादों में हुई बारिश ने कम बारिश के कारण कमजोर पड़ रही खरीफ फसलों को जीवनदान दिया है। इस सीजन में बारिश का वितरण अपेक्षाकृत कम रहने से कई क्षेत्रों में फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई तथा किसानों को खराबे की चिंता सताने लगी थी। ऐसे में शनिवार को हुई बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है और जिन फसलों में अभी सुधार की संभावना है, उन्हें इसका सीधा लाभ मिलने की उम्ममीद है।

नुकसान की भरपाई कर रही बारिश

बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचने के कारण बाजरा, मूंग, मोठ, तिल सहित अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिलने की संभावना है। विशेषकर उन खेतों में, जहां फसल अभी पूरी तरह खराब नहीं हुई है, वहां यह बारिश उत्पादन बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। लगातार बनी नमी से फसलों की बढ़वार को भी गति मिल सकती है। हालांकि जहां फसल पूरी तरह सूख चुकी है, वहां इस बारिश से नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। किसानों के लिए भादों की बारिश केवल वर्तमान फसल के लिए ही राहत लेकर नहीं आई है, बल्कि इससे आगामी रबी फसल की तैयारियों के लिए भी जमीन में नमी का आधार तैयार होने की उम्मीद जगी है।

मिट्टी की नमी का स्तर होगा बेहतर

पर्याप्त बारिश होने पर मिट्टी में नमी का स्तर बेहतर रहेगा, जिससे खेतों की जुताई और आगामी फसल की बुवाई में किसानों को मदद मिल सकती है। साथ ही जलस्रोतों और भूजल स्तर को भी बारिश से कुछ राहत मिलने की संभावना है। इस सीजन में कम बारिश के कारण फसल खराबे और भविष्य की चिंता से जूझ रहे किसानों को भादों की बारिश ने एक बार फिर अच्छे मानसून की आस बंधाई है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी मानसून मेहरबान रहा तो वर्तमान खरीफ फसल को बचाने के साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियों को भी मजबूती मिल सकती है।