कमजोर मांग के बीच ऐपल ने अपने फ्लैगशिप आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स के कंपोनेंट्स का उत्पादन घटा दिया है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कुछ आपूर्तिकर्ताओं से अक्टूबर के लिए उत्पादन योजनाओं में 15 से 20 फीसदी की कटौती करने को कहा है। मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत और ऊंचे दामों की वजह से प्रीमियम स्मार्टफोन की बिक्री शुरुआती अनुमानों के मुताबिक नहीं रही है।
भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये और प्रो मैक्स की 1,79,900 रुपये है। अमेरिकी बाजार में भी दोनों नए मॉडल पिछले संस्करणों के मुकाबले 100 डॉलर महंगे लॉन्च किए गए थे। यूबीएस एनालिस्ट्स के डेटा के अनुसार, 30 से अधिक बाजारों में आईफोन 18 प्रो का औसत वेटिंग टाइम घट गया है। हालांकि कम हुआ डिलीवरी समय हमेशा कम बिक्री नहीं दर्शाता, लेकिन स्थिर आपूर्ति के बीच वेटिंग पीरियड का कम होना यह संकेत देता है कि डिवाइस के लिए कतार में खड़े खरीदार कम हुए हैं।
किन इलाकों और ग्राहकों पर असर?
कीमतों में उछाल उन खरीदारों के लिए बड़ा फैसला बन गया है जो हर दो-तीन साल में फोन बदलते हैं। एक पूर्व स्मार्टफोन एग्जीक्यूटिव ने बताया कि ग्राहकों को अब नए डिवाइस के फायदों और उसके लिए चुकानी पड़ी अतिरिक्त कीमत के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
भारत में रुपये की कमजोरी ने भी प्रीमियम फोन की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इस स्थिति में खरीदारों के सामने कठिन विकल्प है। जो लोग नए फीचर्स चाहते हैं, उन्हें अधिक रकम चुकानी होगी, जबकि कई यूजर पुराने फोन को ही लंबे समय तक इस्तेमाल करने का विकल्प चुन रहे हैं।
फोल्डेबल आईफोन ड्यू पर क्या पड़ेगा असर?
इस मंदी के बीच ऐपल के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन यानी आईफोन ड्यू पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारत में इस 256GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है। इतनी ऊंची कीमत प्रीमियम तकनीक पर खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी इसे खरीदना मुश्किल बना सकती है।
निक्केई एशिया से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, एक स्मार्टफोन के लिहाज से यह कीमत बेहद ज्यादा है। फोल्डेबल स्क्रीन की जटिल मैन्युफैक्चरिंग और ऐपल के कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स इस डिवाइस के लिए अतिरिक्त उत्पादन चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। हालांकि बड़ा डिस्प्ले चाहने वाले कुछ शौकीन खरीदार इसकी तरफ आकर्षित हो सकते हैं, लेकिन करीब 3 लाख रुपये की कीमत इसे आम खरीदारों की पहुंच से दूर रखती है।
स्मार्टफोन क्यों हो रहे हैं महंगे?
यह दबाव सिर्फ ऐपल तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स की मांग बढ़ने से मेमोरी चिप्स महंगे हो रहे हैं, जिसका असर स्मार्टफोन और कंप्यूटर निर्माताओं पर पड़ रहा है।
इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में 16.7 फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं, कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे औसत बिक्री कीमतों में 27.6 फीसदी तक की बढ़ोतरी का अनुमान है।
अब आगे क्या करना चाहिए?
ऐपल के उत्पादन घटाने का यह मतलब नहीं है कि आईफोन के दाम कम हो जाएंगे। कंपनी ने कीमतों में कटौती या आगे के बदलावों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट कृष्णा साई का कहना है कि जो ग्राहक फोन बदलने की सोच रहे हैं, उन्हें इस उम्मीद में नहीं बैठना चाहिए कि दाम जल्द कम होंगे। यदि पुराना फोन ठीक चल रहा है, तो इंतजार करना बेहतर है ताकि ऑफर्स की तुलना की जा सके। अगर तुरंत जरूरत है, तो खरीदारी से पहले पुराने मॉडल्स और दूसरे प्रीमियम विकल्पों की तुलना जरूर कर लें।
